पाली मेडिकल कॉलेज हॉस्टल की बदहाल स्थिति उजागर, भारी फीस के बावजूद सुविधाओं का अभाव
अंधेरा, गंदगी, पानी संकट और खराब लिफ्ट से जूझ रहे MBBS छात्र; प्रबंधन ने बजट और ठेके की कमी बताई वजह

पाली : रामासिया स्थित मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों को भारी फीस चुकाने के बावजूद हॉस्टल में बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है। शनिवार को मौके पर निरीक्षण में हॉस्टल की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई, जहां अंधेरा, गंदगी, पानी की कमी और सुरक्षा से जुड़े गंभीर खामियां सामने आईं।
हॉस्टल परिसर में सीढ़ियों और गलियारों में अंधेरा छाया हुआ था, जिससे छात्रों को मोबाइल की टॉर्च के सहारे आना-जाना करना पड़ रहा है। जगह-जगह कचरा फैला हुआ था और साफ-सफाई के अभाव में हालात बदतर नजर आए। टॉयलेट्स में गंदगी, टूटे कमोड और बदबू के कारण रहना मुश्किल हो गया है।

छात्रों ने बताया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। कार्रवाई के डर से वे खुलकर सामने भी नहीं आ पाते। गर्मी के इस मौसम में पानी और बिजली की समस्या ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।
हॉस्टल में लगी लिफ्ट लंबे समय से बंद पड़ी है और उसके पास कबाड़ का ढेर जमा है। वहीं कई जगह खुले बिजली बोर्ड हादसे को न्योता दे रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था की यह स्थिति छात्रों के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है।
पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं है। छात्रों को कैंपस में लगे RO से पानी लाकर अपनी जरूरत पूरी करनी पड़ती है। सीवरेज लाइन चोक होने से गंदा पानी जमा रहता है और बदबू से वातावरण दूषित रहता है। इसके अलावा हॉस्टल की गैलरी में कबूतरों का जमावड़ा भी गंदगी और असुविधा का कारण बना हुआ है।

हॉस्टल में करीब 20 कमरों में 65 से अधिक छात्र रह रहे हैं। एक छात्र से सालाना 53,722 रुपये शुल्क लिया जा रहा है, जिसमें किराया, बिजली और सुरक्षा शुल्क शामिल है। इसके बावजूद सुविधाओं का यह हाल छात्रों में रोष पैदा कर रहा है।
मामले पर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दिलीप सिंह ने बताया कि बजट समय पर नहीं मिलने और सफाई का नया ठेका नहीं होने के कारण समस्याएं बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि सीवरेज को हाल ही में ठीक करवाया गया था, लेकिन फिर से खराब हो गया। प्रबंधन ने जल्द ही व्यवस्थाओं में सुधार का आश्वासन दिया है।
इस पूरे मामले ने सवाल खड़ा कर दिया है कि इतनी भारी फीस लेने के बावजूद छात्रों को मूलभूत सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रही हैं और जिम्मेदारों की जवाबदेही कब तय होगी।




