पाली में शुरू हुआ ‘साथी अभियान’, निराश्रित बच्चों की पहचान और सहयोग को लेकर जिला स्तर पर अधिकारियों की बैठक आयोजित

पाली, 23 मई। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निर्देश पर ‘साथी अभियान’ (Survey for Aadhar and Access to Tracking and Holistic Inclusion) की शुरुआत की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश भर में बेसहारा और लावारिस बच्चों की पहचान कर उन्हें आधार, विधिक सहायता व सरकारी योजनाओं से जोड़ना है, ताकि कोई बच्चा किसी भी अधिकार या सुविधा से वंचित न रह जाए।
इसी क्रम में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार, शुक्रवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला न्यायाधीश विक्रम सिंह भाटी की अध्यक्षता में जिला संरचना समिति के सदस्यों के साथ प्रशिक्षण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में जिले और तालुका स्तर के अधिकारियों ने भाग लिया। भाटी ने अभियान की विस्तृत जानकारी दी और इसे धरातल पर सफलतापूर्वक लागू करने के लिए विभागीय समन्वय पर बल दिया। उन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह को बिट कांस्टेबल के माध्यम से निराश्रित बच्चों की पहचान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
साथ ही चिकित्सा, बाल विकास और शिक्षा विभागों को निर्देशित किया गया कि ANM, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आशा सहयोगिनी के माध्यम से PLV (पैरा लीगल वॉलंटियर्स) को सहयोग दिया जाए।

इस अवसर पर प्रवीण कुमार जांगिड (शिक्षा विभाग), डॉ. वेदान्त गर्ग (उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी), डॉ. टीना अरोड़ा (DCR), जितेंद्र सिंह सोनीगरा (बाल अधिकारिता विभाग), तहसीलदार देसूरी हरेंद्र सिंह चौहान, प्रतीक शर्मा (राजस्व विभाग, सुमेरपुर), तहसीलदार बाली जितेंद्र सिंह, बाबूलाल चौहान (राजस्व विभाग), पैनल अधिवक्ता और पैरा लीगल वॉलंटियर्स उपस्थित रहे।



