‘मन नहीं, अंतरात्मा की आवाज सुनें, वही दिखाती है सही राह’ — चातुर्मास प्रवचन में डॉ. वरुण मुनि का प्रेरक संदेश

पाली : श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में रुई कटला स्थित रघुनाथ स्मृति भवन में गुरुदेव सुकन मुनि के सानिध्य में चल रहे चातुर्मास के दौरान शुक्रवार को आयोजित धर्मसभा में डॉ. वरुण मुनि ने श्रद्धालुओं को जीवन को सही दिशा देने वाले प्रेरक संदेश दिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने मन की नहीं, बल्कि अंतरात्मा की आवाज सुननी चाहिए, क्योंकि मन भटका सकता है, जबकि अंतरात्मा हमेशा सत्य और सही मार्ग का संकेत देती है।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपनी अंतरात्मा के अनुसार निर्णय लेता है, वह जीवन में कभी भ्रमित नहीं होता और सदैव धर्म एवं सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
प्रवचन के दौरान डॉ. वरुण मुनि ने जीव दया का महत्व बताते हुए एक प्रेरक प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति ने अपने शहर में संचालित बूचड़खाने का विरोध केवल जीवों की रक्षा के लिए किया। विरोध के कारण कसाई उसके विरोधी बन गए, लेकिन उसने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। उसके निधन के बाद उन्हीं लोगों ने उसके त्याग और जीव दया से प्रेरित होकर बूचड़खाना बंद करने का निर्णय लिया। यह उदाहरण बताता है कि सच्चे धर्म और करुणा का प्रभाव मृत्यु के बाद भी समाज पर बना रहता है।

उन्होंने कहा कि आज समाज में सबसे बड़ा संकट विश्वास का है। पति-पत्नी, परिवार और रिश्तों में भरोसा कम होता जा रहा है। यदि संबंधों की नींव विश्वास पर नहीं होगी तो समय आने पर वे कमजोर पड़ जाएंगे।
उन्होंने व्यापार और सामाजिक जीवन में ईमानदारी का महत्व बताते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपने कर्तव्य और व्यवसाय में पूरी निष्ठा और ईमानदारी रखता है, वही समाज में सम्मान प्राप्त करता है। यदि एक व्यक्ति सही मार्ग अपनाता है तो उसके आचरण से दूसरे लोग भी प्रेरित होते हैं।
डॉ. वरुण मुनि ने युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश देते हुए कहा कि गुटखा, शराब और अन्य नशे न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि पूरे परिवार को आर्थिक और मानसिक संकट में डाल देते हैं। कैंसर और लीवर जैसी गंभीर बीमारियां परिवार की खुशियां छीन लेती हैं। इसलिए स्वस्थ और संयमित जीवन ही सच्चा सुख प्रदान करता है।

उन्होंने भगवान महावीर और भगवान राम के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रेम, करुणा और सेवा ही धर्म का मूल आधार हैं। शबरी की भगवान राम के प्रति निष्काम भक्ति और भगवान महावीर का प्रत्येक जीव के प्रति प्रेम मानवता के लिए आदर्श हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे तेरा-मेरा और स्वार्थ से ऊपर उठकर सभी जीवों के प्रति प्रेम और सद्भाव का भाव रखें।
प्रवचन के पश्चात उपवास, बेला, तेला, तेरा एवं 14 उपवास सहित विभिन्न तप करने वाले तपस्वियों की संतों एवं उपस्थित श्रद्धालुओं ने अनुमोदना कर उनका उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर गुरुदेव सुकन मुनि, अमृत मुनि, महेश मुनि, अखिलेश मुनि, साध्वी प्रीति सुधा एवं साध्वी संयम सुधा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मसभा में उपस्थित रहे। धर्मसभा पूरे समय भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रही।



