पाली में मानवता की मिसाल, अणची बाई के निधन के बाद परिवार ने किया नेत्रदान, दो लोगों की आंखों में लौटेगी रोशनी

पाली : शहर में एक परिवार ने अपने गहरे दुख के बीच ऐसा निर्णय लिया, जो दो दृष्टिबाधित लोगों के जीवन में नई रोशनी लेकर आएगा। शहर के टैगोर नगर स्थित आदेश्वर रॉयल निवासी दिवंगत अणची बाई छाजेड़ के निधन के बाद उनके परिजनों ने नेत्रदान कर समाज के सामने मानवता और सेवा का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
दिवंगत अणची बाई के असामयिक निधन की सूचना मिलते ही आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान, पाली चैप्टर सक्रिय हुआ। संस्था के अध्यक्ष केवलचंद कवाड़, सचिव भंवरलाल सेमलानी तथा सदस्य रोशन नाहर ने परिजनों से संपर्क कर नेत्रदान के महत्व की जानकारी दी और इस पुण्य कार्य के लिए प्रेरित किया।
परिवार के सदस्यों सुरेश छाजेड़, महावीर छाजेड़ और जितेंद्र छाजेड़ ने सामाजिक सरोकार को प्राथमिकता देते हुए नेत्रदान के लिए तुरंत सहमति प्रदान की। इसके बाद चिकित्सकीय टीम ने निर्धारित समय के भीतर नेत्र सुरक्षित रूप से प्राप्त किए।
इस प्रक्रिया में डॉ. आर.के. गर्ग, डॉ. विपुल नागर, हेमंत चोपड़ा, गौतमचंद चोपड़ा, अशोक बाफना, आई तकनीशियन रईस खान, हंसमुख बांठिया और कन्हैयालाल परिहार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दान किए गए कॉर्निया को सुरक्षित रूप से राजस्थान रोडवेज के कर्मचारियों पप्पूराम और मोहन विश्नोई के सहयोग से जयपुर भेजा गया। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा दो दृष्टिबाधित व्यक्तियों का कॉर्निया प्रत्यारोपण किया जाएगा, जिससे उन्हें फिर से देखने की उम्मीद मिलेगी।
आई बैंक सोसायटी के पदाधिकारियों ने दिवंगत के परिजनों के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि नेत्रदान ऐसा महादान है, जो किसी व्यक्ति के निधन के बाद भी दो लोगों के जीवन को रोशन कर सकता है। उन्होंने समाज से अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा कि जागरूकता और संवेदनशीलता से हजारों दृष्टिबाधित लोगों के जीवन में उजाला लाया जा सकता है।
पाली में इस प्रेरणादायी पहल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि मानव सेवा का सबसे बड़ा रूप वही है, जो किसी दूसरे के जीवन में नई उम्मीद और नई रोशनी भर दे।



