शिक्षक सम्मेलन में शिक्षा, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण पर मंथन, विद्यालयों को संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण का केंद्र बनाने का संकल्प

पाली : अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा), जिला पाली के तत्वावधान में श्री सोनाणा खेतलाजी जूनी धाम में आयोजित दो दिवसीय जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन का शनिवार को गरिमामय वातावरण में समापन हुआ। सम्मेलन में जिलेभर से पहुंचे सैकड़ों शिक्षक, संगठन पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दो दिनों तक चले सम्मेलन में शिक्षक हितों, शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यालय विकास, पर्यावरण संरक्षण, संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण और सामाजिक सरोकारों सहित विभिन्न विषयों पर विस्तार से विचार-मंथन किया गया।
समापन अवसर पर शिक्षकों एवं कार्यकर्ताओं ने विद्यालयों को केवल शिक्षण का केंद्र न रखकर संस्कार, संस्कृति, अनुशासन और राष्ट्रभाव के निर्माण का केंद्र बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। साथ ही विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा शिक्षक हितों से जुड़े विषयों के समाधान के लिए संगठित एवं निरंतर प्रयास करने का निर्णय लिया गया।
सम्मेलन के द्वितीय दिवस के उद्घाटन सत्र में मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक कानाराम वागोरिया, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक तेजसिंह पंवार, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी चन्द्रेश पाल करणोत, संयुक्त निदेशक पाली, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक प्रवीण कुमार जांगीड़, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी रानी सुमेर सिंह, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी मारवाड़ जंक्शन मिश्रीलाल बंजारा, विभाग संगठन मंत्री विजेंद्र कुमार निर्मल एवं प्रदेश प्रकोष्ठ आयाम से उर्मिला यति की उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष डॉ. विक्रम सिंह जैतावत ने की।
उद्घाटन सत्र में शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं संगठन पदाधिकारियों ने शिक्षकों से शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक तेजसिंह पंवार ने पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने पंचतत्व की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए मानव जीवन और प्रकृति के बीच गहरे संबंध की चर्चा की।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। विद्यार्थियों में प्रकृति और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने में शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विद्यालयों के माध्यम से बच्चों को पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के महत्व और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
सम्मेलन के प्रथम सत्र में जिला मंत्री ओमप्रकाश कुमावत ने संगठनात्मक विषयों पर विस्तृत वार्ता प्रस्तुत की। उन्होंने संगठन की राष्ट्रीय स्तर से लेकर विद्यालय स्तर तक की संरचना, कार्यपद्धति और विभिन्न स्तरों पर कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि संगठन की वास्तविक शक्ति विद्यालय स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं और शिक्षक साथियों की सहभागिता से निर्मित होती है। संगठन का उद्देश्य केवल शिक्षक हितों से जुड़े विषयों को उठाना नहीं है, बल्कि शैक्षिक उन्नयन, संस्कारयुक्त शिक्षा, सामाजिक सरोकार और राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका को प्रभावी बनाना भी है।
सम्मेलन में शिक्षक हितों से जुड़े विभिन्न विषयों एवं समस्याओं पर गंभीरता से विचार-विमर्श किया गया। शिक्षकों ने अपने क्षेत्रों में सामने आ रही समस्याओं, सेवा संबंधी विषयों और अन्य आवश्यकताओं को संगठन के समक्ष रखा।
इन समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित शिक्षा अधिकारियों से वार्ता करने तथा जिला स्तर पर समाधान संभव नहीं होने वाले विषयों को प्रदेश स्तर पर भेजकर प्रभावी पैरवी करने का निर्णय लिया गया। सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षक समस्याओं के समाधान के लिए नियमसम्मत और व्यवस्थित तरीके से प्रयास किए जाएं।

दो दिवसीय सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यालय विकास, शिक्षक हित, पर्यावरण संरक्षण, संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।
शिक्षक साथियों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। साथ ही विद्यालय स्तर पर आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को सामने रखते हुए उनके नियमसम्मत समाधान पर विचार किया गया। वक्ताओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
सम्मेलन के समापन अवसर पर शिक्षकों एवं कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे अपने विद्यालयों को केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि उन्हें संस्कार, संस्कृति, अनुशासन एवं राष्ट्रभाव के निर्माण का केंद्र बनाने के लिए प्रयास करेंगे।
संकल्प लिया गया कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति विद्यार्थियों और समाज में जागरूकता विकसित करने तथा शिक्षक हितों से जुड़े विषयों के समाधान के लिए संगठनात्मक रूप से निरंतर प्रयास किए जाएंगे।
समापन अवसर पर जिलाध्यक्ष डॉ. विक्रम सिंह जैतावत ने सम्मेलन में शामिल सभी अतिथियों, शिक्षा विभाग के अधिकारियों, संगठन पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं शिक्षक साथियों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने सम्मेलन की सफलता में प्रत्येक शिक्षक एवं कार्यकर्ता के योगदान को महत्वपूर्ण बताते हुए संगठन को मजबूत बनाने और शिक्षक हितों की रक्षा के साथ शैक्षिक उन्नयन के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की एकजुटता और सक्रिय सहभागिता से शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक कार्यों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
इस अवसर पर खंड अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह सोलंकी, खंड मंत्री मुकेश कुमार जांगीड़, वरिष्ठ उपाध्यक्ष तेजकरण परिहार, कोषाध्यक्ष कुंदन सिंह राजपुरोहित, उपाध्यक्ष रघुवीर सिंह सहारण, ढलाराम राठौड़, यशपाल सिंह, सुनील चावला, विक्रम कुमार मीणा, रामदेवाराम, सुरज्ञान वर्मा, भैरूसिंह राणावत, विवेक शर्मा, जेम्स मैथ्यू, त्रिभुवन सिंह एवं मांगीलाल सोलंकी सहित जिले के सभी खंडों के अध्यक्ष, पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे।
दो दिवसीय सम्मेलन का समापन “हमारा विद्यालय हमारा तीर्थ, विद्यार्थी हमारा दायित्व और राष्ट्र निर्माण हमारा संकल्प” के भाव के साथ हुआ। इस दौरान शिक्षकों ने शिक्षा, समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने तथा महासंघ की रीति-नीति एवं उद्देश्यों के अनुरूप कार्य करने का संकल्प दोहराया।



