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पाली में श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंगा राधाष्टमी महोत्सव, 108 व्यंजनों से लगाया छप्पन भोग, कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां

पाली : इस्कॉन पाली की ओर से भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के अवसर पर अमरनाथ नगर स्थित इस्कॉन केंद्र में राधाष्टमी महोत्सव श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। महोत्सव के दौरान सुबह से देर शाम तक विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। श्री श्री राधा-गोविन्दजी के विशेष श्रृंगार से लेकर अभिषेक, छप्पन भोग, महाआरती, कथा-प्रवचन, कीर्तन और नाट्य प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भक्तिमय वातावरण में सराबोर कर दिया।

इस्कॉन के कार्तिक कृष्ण प्रभु ने बताया कि राधाष्टमी के अवसर पर सुबह से ही धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन शुरू हो गया था। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ कार्यक्रमों में भाग लिया और श्री राधा-गोविन्दजी के दर्शन एवं पूजा-अर्चना की।

महोत्सव की शुरुआत प्रातः माला जप और मंगल आरती से हुई। इसके बाद फूलों से श्री श्री राधा-गोविन्दजी, श्री श्री गौर-निताई एवं इस्कॉन केंद्र का विशेष श्रृंगार किया गया। मंदिर परिसर में भक्ति गीतों और हरिनाम संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

सायंकाल मुख्य कार्यक्रमों की शुरुआत कीर्तन के साथ हुई। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से हरिनाम संकीर्तन में भाग लिया और भक्ति भाव के साथ भगवान का गुणगान किया।

मुख्य कार्यक्रम के दौरान पंचतत्वों से श्री राधा-गोविन्दजी का विशेष अभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद चरणामृत को श्रद्धालुओं में वितरित किया गया, जिसे भक्तों ने श्रद्धा के साथ ग्रहण किया।

अभिषेक के दौरान मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। भक्ति संगीत और कीर्तन के बीच हुए इस धार्मिक आयोजन से पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो गया।

राधाष्टमी महोत्सव के दौरान श्री राधा-कृष्णजी को छप्पन भोग अर्पित किया गया। भक्तों ने विभिन्न प्रकार के 108 व्यंजन तैयार कर भगवान को भोग लगाया।

आयोजकों के अनुसार राधारानी को प्रिय माने जाने वाले विभिन्न पदार्थों एवं रंगों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया। इनमें नीला रंग, रबड़ी, अरबी, होली पर्व तथा पान बीड़े से जुड़े भोग शामिल रहे। भक्तों द्वारा श्रद्धा एवं सेवा भाव से तैयार किए गए विभिन्न व्यंजनों को भगवान को समर्पित करने के बाद महाआरती का आयोजन किया गया।

छप्पन भोग के बाद विशेष महाआरती हुई। इस दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर हरिनाम संकीर्तन में शामिल हुए। मंदिर परिसर में ‘हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे। हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे’ महामंत्र का सामूहिक जाप हुआ। कीर्तन और महाआरती के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से नृत्य किया और भगवान के नाम का संकीर्तन किया।

इस्कॉन के कार्तिक कृष्ण प्रभु ने कथा एवं प्रवचन के माध्यम से श्री राधारानी के प्राकट्य और राधा तत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने राधा-कृष्ण को युगल स्वरूप बताते हुए राधा तत्व की धार्मिक मान्यता पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि इस्कॉन की वैष्णव परंपरा में राधारानी को भगवान श्रीकृष्ण की ह्लादिनी अर्थात आनंद प्रदान करने वाली शक्ति के रूप में समझाया जाता है। उन्होंने कहा कि राधा और कृष्ण लीला में दो रूपों में दिखाई देते हैं, जबकि उनके आध्यात्मिक संबंध को अभिन्न माना जाता है। प्रवचन के दौरान उन्होंने चैतन्य महाप्रभु से जुड़ी गौड़ीय वैष्णव परंपरा की मान्यताओं और हरिनाम संकीर्तन के महत्व पर भी प्रकाश डाला।

कार्तिक कृष्ण प्रभु ने कहा कि भक्तिमार्ग में हरिनाम संकीर्तन, महामंत्र जाप और सेवा भाव को महत्वपूर्ण माना गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से भगवान के नाम का स्मरण करने और सेवा भावना के साथ धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने का आह्वान किया। उन्होंने श्रील प्रभुपाद द्वारा स्थापित राधा-कृष्ण की युगल उपासना और हरिनाम महामंत्र के प्रचार-प्रसार से जुड़े विषयों पर भी श्रद्धालुओं को जानकारी दी।

धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। नाट्य कार्यक्रम के माध्यम से श्री राधा-कृष्ण के प्रेम, नाम जाप की महिमा तथा विग्रह सेवा से जुड़े संदेश प्रस्तुत किए गए।

नाट्य प्रस्तुति में कलाकारों ने धार्मिक प्रसंगों को रोचक तरीके से प्रस्तुत किया, जिसे श्रद्धालुओं ने काफी पसंद किया। कार्यक्रम के माध्यम से भक्ति, सेवा और नाम संकीर्तन से जुड़े संदेशों को सरल रूप में प्रस्तुत किया गया।

इसके बाद नृत्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। प्रस्तुतियों के माध्यम से श्री राधा-कृष्ण के युगल प्रेम और भगवान की ह्लादिनी आनंद प्रदायिनी शक्ति से जुड़े आध्यात्मिक भावों को दर्शाया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए। भक्ति गीतों और नृत्य प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया।

कार्यक्रम के अंत में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भक्तों ने राधाष्टमी महोत्सव में आयोजित धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेकर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया।

आयोजकों ने बताया कि राधाष्टमी महोत्सव का उद्देश्य श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण और श्री राधारानी की भक्ति, हरिनाम संकीर्तन एवं सेवा भाव से जोड़ना रहा। शहरवासियों ने भी महोत्सव में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

अमरनाथ नगर स्थित इस्कॉन केंद्र में आयोजित राधाष्टमी महोत्सव के दौरान सुबह से शाम तक भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना रहा। राधारानी के प्रति सेवा, भक्ति और समर्पण के भाव के साथ आयोजित यह महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभव का अवसर बना।

Rajasthan Today

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