जवाई में 1 किलोमीटर के नियम के विरोध में ग्रामीण लामबंद, 11 गांवों ने बनाई संघर्ष समिति

पाली/बाली : जवाई क्षेत्र को लेकर हाल ही में आए माननीय उच्च न्यायालय के फैसले के विरोध में जवाई बेल्ट के ग्रामीणों में असंतोष सामने आया है। फैसले में लेपर्ड केव से एक किलोमीटर की दूरी से जुड़े नियम को लेकर ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है। इसके विरोध में क्षेत्र के कई गांवों के ग्रामीण एकजुट हुए हैं और अपनी मांगों को प्रशासन एवं सरकार तक पहुंचाने के लिए जवाई संघर्ष समिति का गठन किया है।
इसी क्रम में मंगलवार शाम जीवदा माताजी मंदिर, सेणा तथा वरावल हनुमानजी मंदिर में ग्रामीणों की बड़ी बैठकें आयोजित की गईं। बैठकों में जवाई क्षेत्र से जुड़े विभिन्न गांवों के सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए और प्रस्तावित नियम को लेकर अपनी चिंताएं रखीं।
जवाई क्षेत्र के बलवना, बीसलपुर, पैरवा, जीवदा, सेणा, दुदनी, मोरी बेड़ा, वरावल, रघुनाथपुरा, कोठार और वेलार गांवों के ग्रामीणों ने बैठक में भाग लिया। ग्रामीणों ने एकजुट होकर जवाई संघर्ष समिति के माध्यम से अपनी मांग को आगे रखने का निर्णय लिया।
बैठक में ग्रामीणों का कहना था कि जवाई क्षेत्र में किसान, पशुपालक और पर्यटन से जुड़े लोग लंबे समय से क्षेत्र की प्राकृतिक परिस्थितियों के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन-यापन कर रहे हैं। ऐसे में लेपर्ड केव से एक किलोमीटर के दायरे से संबंधित नियम को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता है।

जीवदा, सेणा और वरावल में आयोजित बैठकों की अगुआई किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष जयेन्द्र सिंह गल्थनी, रघुवीर सिंह देवड़ा बीसलपुर, जसवंत सिंह गल्थनी, राजपूत करनी सेना जोधपुर संभाग अध्यक्ष मनमोहन सिंह बीसलपुर, संग्राम सिंह वेलार, लोकेंद्र सिंह पैरवा, विक्रम सिंह जीवदा एवं हुपेंद्र सिंह सेणा ने की।
बैठकों में ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर चर्चा की। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एक स्वर में फैसले के संबंध में अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
जवाई संघर्ष समिति से जुड़े ग्रामीणों ने लेपर्ड केव से एक किलोमीटर की दूरी के नियम का विरोध जताया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह का प्रावधान लागू होने से किसानों और पशुपालकों के साथ-साथ जवाई क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों से जुड़े लोगों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जवाई क्षेत्र में तेंदुए और स्थानीय आबादी लंबे समय से एक-दूसरे के साथ सह-अस्तित्व में रहे हैं। उनके अनुसार क्षेत्र की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्थानीय लोगों के हितों और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

ग्रामीणों ने बैठक में कहा कि जवाई क्षेत्र की पहचान वन्यजीव और पर्यटन के कारण देशभर में बनी है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग पर्यटन गतिविधियों से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।
ग्रामीणों का दावा है कि लेपर्ड केव से एक किलोमीटर के दायरे से संबंधित प्रतिबंधों का प्रभाव स्थानीय विकास और पर्यटन गतिविधियों पर पड़ सकता है। इसी कारण ग्रामीण इस मामले को प्रशासन एवं सरकार के समक्ष प्रमुखता से रखने की तैयारी कर रहे हैं।
जवाई संघर्ष समिति ने बैठक के दौरान निर्णय लिया कि फैसले के विरोध में आगामी दिनों में जिला कलेक्टर, पाली को शांतिपूर्ण ज्ञापन सौंपा जाएगा। ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीण अपनी मांगों और क्षेत्र से जुड़ी चिंताओं को प्रशासन के समक्ष रखेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं किया गया तो आगामी दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे जवाई क्षेत्र के किसानों, पशुपालकों, स्थानीय निवासियों और पर्यटन से जुड़े लोगों के हितों को लेकर अपनी आवाज आगे भी उठाते रहेंगे।
बैठकों में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी से स्पष्ट हुआ कि जवाई क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर स्थानीय स्तर पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। अब ग्रामीणों की नजर आगामी ज्ञापन और प्रशासन की ओर से होने वाली कार्रवाई पर रहेगी।



