पाली में कृमि मुक्ति अभियान का मॉप अप दिवस, दवा से वंचित बच्चों को खिलाई गई एल्बेंडाजोल

पाली : चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग पाली की ओर से राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस अभियान के तहत बुधवार को जिलेभर में मॉप अप दिवस आयोजित किया गया। इस दौरान 15 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर किसी कारणवश कृमिनाशक दवा लेने से वंचित रह गए बच्चों और किशोर-किशोरियों को चिन्हित कर एल्बेंडाजोल की निर्धारित खुराक खिलाई गई।
स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य अभियान के माध्यम से जिले के पात्र बच्चों और किशोर-किशोरियों को कृमि संक्रमण से बचाना तथा उनके बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और शारीरिक विकास को सुनिश्चित करना रहा।
सीएमएचओ डॉ. विकास मारवाल ने बताया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के तहत 15 सितंबर को जिलेभर में अभियान आयोजित किया गया था। अभियान के दौरान विभिन्न कारणों से जो बच्चे कृमिनाशक दवा नहीं ले पाए थे, उन्हें चिन्हित किया गया। ऐसे बच्चों को मॉप अप दिवस के दौरान दवा उपलब्ध करवाकर खिलाई गई।
उन्होंने बताया कि मॉप अप दिवस का उद्देश्य अभियान के दौरान दवा से छूट गए पात्र बच्चों को भी कृमिनाशक दवा उपलब्ध करवाना था, ताकि कोई भी पात्र बच्चा अभियान से वंचित नहीं रहे।

एडिशनल सीएमएचओ डॉ. जीतकुमार गुर्जर ने बताया कि मॉप अप दिवस के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमों के साथ विद्यालयों एवं आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से भी दवा से वंचित बच्चों तक पहुंच बनाने का प्रयास किया गया।
संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों और कार्मिकों ने अभियान के तहत चिन्हित बच्चों को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार कृमिनाशक एल्बेंडाजोल दवा खिलाई। अभियान में 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों एवं किशोर-किशोरियों को शामिल किया गया।
मॉप अप दिवस के दौरान बच्चों और अभिभावकों को कृमि संक्रमण से बचाव के उपायों की जानकारी भी दी गई। स्वास्थ्य विभाग की ओर से व्यक्तिगत स्वच्छता, नियमित रूप से हाथ धोने, साफ पानी का उपयोग करने और आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के महत्व के बारे में जागरूक किया गया।
बच्चों को विशेष रूप से खाना खाने से पहले तथा शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से हाथ धोने के लिए प्रेरित किया गया। इसके साथ ही नाखून साफ और छोटे रखने तथा स्वच्छ एवं सुरक्षित भोजन-पानी का उपयोग करने की सलाह दी गई।
डॉ. जीतकुमार गुर्जर ने बताया कि कृमि संक्रमण का बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। संक्रमण के कारण बच्चों में पोषण की कमी, कमजोरी और एनीमिया जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसका असर बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ उनके शैक्षणिक विकास पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि समय-समय पर निर्धारित कृमिनाशक दवा देने और स्वच्छता संबंधी अच्छी आदतों को अपनाने से कृमि संक्रमण की रोकथाम में मदद मिलती है।

सीएमएचओ डॉ. विकास मारवाल ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर जागरूक रहें और अभियान के दौरान पात्र बच्चों को कृमिनाशक दवा अवश्य दिलवाएं। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों में स्वच्छता की आदतें विकसित करने पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि बच्चों को खाना खाने से पहले और शौचालय के बाद साबुन से हाथ धोने, नाखूनों को साफ एवं छोटा रखने तथा साफ-सुथरे और सुरक्षित भोजन एवं पानी का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के बाद आयोजित मॉप अप दिवस के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग ने उन बच्चों तक दोबारा पहुंच बनाने का प्रयास किया, जो 15 सितंबर को किसी कारण से दवा नहीं ले पाए थे। जिलेभर में स्वास्थ्य विभाग की टीमों, विद्यालयों और आंगनवाड़ी केंद्रों के सहयोग से अभियान को आगे बढ़ाया गया।
इस पहल के माध्यम से दवा से वंचित रहे पात्र बच्चों को अभियान से जोड़ते हुए कृमि संक्रमण की रोकथाम, बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।



