10 अक्टूबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, पाली में राजीनामा योग्य मामलों के त्वरित निस्तारण की तैयारी, न्यायिक अधिकारियों को दिए निर्देश

पाली : राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार वर्ष 2026 की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 10 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा। राष्ट्रीय लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित राजीनामा योग्य प्रकरणों के साथ-साथ प्री-लिटिगेशन मामलों का भी आपसी सहमति और समझौते के आधार पर निस्तारण किया जाएगा।
राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पाली की ओर से तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसी क्रम में जिला एवं सेशन न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राजेन्द्र कुमार ने पाली न्यायक्षेत्र के न्यायिक अधिकारियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के राजीनामा योग्य मामलों को निस्तारण के लिए रखा जाएगा। इनमें राजीनामा योग्य फौजदारी प्रकरण, परक्राम्य विलेख अधिनियम की धारा 138 से संबंधित मामले, धन वसूली के प्रकरण, एमएसीटी मामले, बिजली-पानी एवं अन्य बिल भुगतान से जुड़े मामले शामिल हैं।
इसके अलावा वैवाहिक विवादों में तलाक से संबंधित मामलों को छोड़कर अन्य राजीनामा योग्य प्रकरण, भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले, सिविल प्रकरण तथा अन्य समझौता योग्य मामलों का भी लोक अदालत के माध्यम से निस्तारण किया जा सकेगा।

बैठक में जिला एवं सेशन न्यायाधीश राजेन्द्र कुमार ने न्यायिक अधिकारियों को निर्देश दिए कि अधिक से अधिक राजीनामा योग्य प्रकरणों को चिन्हित कर उनमें प्री-काउन्सलिंग कराई जाए, ताकि पक्षकारों के बीच आपसी सहमति की संभावनाओं को तलाशते हुए मामलों का लोक अदालत में प्रभावी ढंग से निस्तारण किया जा सके।
उन्होंने विशेष रूप से शमनीय एवं लघु प्रकृति के प्रकरणों पर ध्यान देने के निर्देश दिए। साथ ही चेक अनादरण से संबंधित मामलों को भी प्राथमिकता के साथ चिन्हित कर उनके निस्तारण के लिए आवश्यक प्रयास करने को कहा गया।
राष्ट्रीय लोक अदालत में केवल न्यायालयों में लंबित मामलों का ही निस्तारण नहीं होगा, बल्कि बैंक एवं वित्तीय संस्थाओं से प्राप्त प्री-लिटिगेशन प्रकरणों को भी समझौते के माध्यम से निस्तारित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
बैठक में संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि ऐसे मामलों में पक्षकारों से संपर्क और आवश्यक काउन्सलिंग कर अधिक से अधिक मामलों को लोक अदालत के माध्यम से निपटाने का प्रयास किया जाए। इससे विवाद न्यायालय में पहुंचने से पहले ही आपसी सहमति से समाप्त किए जा सकेंगे।
बैठक में विशेष लोक अदालत—एनआई एक्ट प्रकरण तथा ‘मीडियेशन फॉर द नेशन’ अभियान के सफल क्रियान्वयन को लेकर भी न्यायिक अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए गए।
अधिकारियों से कहा गया कि समझौते योग्य मामलों में पक्षकारों को मध्यस्थता एवं लोक अदालत के माध्यम से विवाद समाप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए, ताकि लंबित मामलों का प्रभावी और त्वरित निस्तारण सुनिश्चित हो सके।

बैठक में पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश जगदीश जाणी, अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश शरद तंवर, एससी/एसटी प्रकरण न्यायालय के न्यायाधीश राकेश गोरा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण पाली के सचिव विक्रम सिंह भाटी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हेमलता भारती, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिप्सा चारण एवं कविता कच्छवाहा, किशोर न्याय बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट गजेन्द्र कुमार सहित न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा न्यायिक मजिस्ट्रेट पूजा बाना, न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-1 मनीषा चारण, न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-2 भव्या झरवाल, न्यायिक मजिस्ट्रेट एनआई एक्ट-1 शालिनी चौधरी, एनआई एक्ट-2 वीनस चौधरी तथा एनआई एक्ट-3 रश्मी गुणपाल सहित तालुका क्षेत्र के न्यायिक अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में भाग लिया।
10 अक्टूबर को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में राजीनामा योग्य मामलों से जुड़े पक्षकारों को आपसी सहमति के आधार पर विवाद समाप्त करने का अवसर मिलेगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से अधिकाधिक मामलों को लोक अदालत में लाकर उनका प्रभावी निस्तारण कराने पर जोर दिया जा रहा है।
राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से लंबित मामलों के निस्तारण के साथ पक्षकारों को समय और संसाधनों की बचत का अवसर भी मिलेगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने संबंधित न्यायालयों और अधिकारियों को मामलों की पहचान, प्री-काउन्सलिंग और समझौते की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं।



