
पाली : शहर के रामलीला मैदान में दशहरा पर्व के अवसर पर श्री रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित नौ दिवसीय 51वीं संगीतमय रामलीला का समापन भक्ति, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच हुआ। रामलीला की अंतिम कड़ी के रूप में भरत मिलाप, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा कलाकारों के सम्मान में पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने के प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया गया। वहीं, भक्ति गीतों, मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों और हास्य कार्यक्रमों ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।
श्री रामलीला कमेटी के प्रवक्ता पवन पाण्डेय ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ रामकथा वंदना के साथ हुआ। इसके बाद कलाकारों ने एक के बाद एक आकर्षक प्रस्तुतियां देकर रामलीला मैदान को भक्तिमय बना दिया। आयोजन के अंतिम दिन बड़ी संख्या में दर्शकों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया और कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना की।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान नृत्यांगनाओं ने ‘राम का गुणगान कर लो रे…’ गीत पर मनमोहक प्रस्तुति दी। इसके बाद ‘कब आओगे राम अयोध्या…’ गीत पर कलाकारों ने सुंदर नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की तालियां बटोरीं।
भरत मिलाप के प्रसंग के दौरान ‘दर्शन पाओ रे…’ गीत पर नृत्य और संगीत की आकर्षक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में विशेष रंग भर दिया। भक्ति गीतों और भावपूर्ण अभिनय के माध्यम से कलाकारों ने भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा और समर्पण की भावना को जीवंत किया।
कार्यक्रम में प्रस्तुतियों के दौरान रामभक्ति का वातावरण बना रहा। दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय, नृत्य और संगीत की सराहना करते हुए तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया।

रामलीला के अंतिम दिन भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता के अयोध्या लौटने के प्रसंग का मंचन किया गया। भरत मिलाप के भावपूर्ण प्रसंग ने रामकथा के पारिवारिक प्रेम, त्याग, समर्पण और मर्यादा के संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
कलाकारों ने संवाद, अभिनय और संगीत के समन्वय से रामकथा के प्रसंगों को मंच पर साकार किया। नृत्यांगनाओं की प्रस्तुतियों ने भी श्रीराम के अयोध्या आगमन के प्रसंग को आकर्षक बनाया। धार्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को भारतीय परंपराओं तथा रामायण के आदर्शों से जुड़ने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में हास्य कलाकार अर्जुन बड़गोती ने अपनी हास्य प्रस्तुतियों से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। उनकी प्रस्तुतियों पर दर्शक हंसते नजर आए। धार्मिक मंचन के साथ हास्य का समावेश कार्यक्रम का आकर्षण रहा।
वहीं, संगीतकार दिगम्बर व्यास, राजेन्द्र सिंह सोढ़ा और पार्श्वगायक चंचल गोस्वामी ने अपने मधुर संगीत एवं कर्णप्रिय स्वरों से समां बांधा। भक्ति गीतों और संगीत की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
श्री रामलीला कमेटी की ओर से आयोजित संपूर्ण रामलीला में स्थानीय कलाकारों ने लगन, निष्ठा और निःशुल्क सेवाभाव के साथ अपनी प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों ने अभिनय, संगीत और नृत्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति एवं धार्मिक परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
अंतिम दिन के मंचन में रोहित शर्मा, गोविंद गोयल, सुमित्रा राजपुरोहित, परमेश्वर सिंह दुदावत, नरेश परिहार, जयेश शर्मा, अंकित रांका, नेमीचंद टांक, मांगीलाल तंवर, अर्जुन बड़गोती, अंजली भाटी, जया जोशी, कंचन दासानी, साक्षी, रुपाली जोशी, पिंकी, झील, परी, सजना, रानी, खुशी, अनामिका राजपुरोहित, भाविका और खुशबू शर्मा सहित अनेक कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया।
इन कलाकारों की प्रस्तुतियों ने रामलीला के विभिन्न प्रसंगों को प्रभावी बनाया। कमेटी की ओर से कलाकारों के समर्पण और सहयोग को आयोजन की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।

समापन समारोह में वन्देमातरम् एकेडमी के संस्थापक राजेन्द्र सिंह भाटी, कैलाश टवानी और नगर निगम पार्षद नवीन वागोरिया अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। श्री रामलीला कमेटी के अध्यक्ष परमेश्वर जोशी, उपाध्यक्ष एम.एम. बोड़ा, सचिव हीरालाल व्यास, सह सचिव देवीलाल पंवार, घनश्याम भाटी, घीसूलाल व्यास, दर्शन तलवार, बाबूलाल कुमावत और प्रकाश चौधरी ने अतिथियों का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया।
इस दौरान आयोजन से जुड़े सदस्यों और कलाकारों के योगदान की सराहना की गई। समारोह में रामलीला के सफल आयोजन के लिए कलाकारों, सहयोगियों और कमेटी सदस्यों के सामूहिक प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया गया।
नौ दिवसीय संगीतमय रामलीला के समापन अवसर पर अतिथियों एवं कमेटी सदस्यों ने रामलीला में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। इस पहल के माध्यम से कलाकारों की मेहनत, प्रतिभा और सांस्कृतिक योगदान को प्रोत्साहित किया गया।
समारोह का समापन भक्ति गीतों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और भरत मिलाप के भावपूर्ण प्रसंग की स्मृतियों के साथ हुआ। 51वीं संगीतमय रामलीला ने एक बार फिर पाली में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक सहभागिता का संदेश दिया। स्थानीय कलाकारों के समर्पण और कमेटी के प्रयासों से आयोजित यह कार्यक्रम दर्शकों के लिए यादगार बना।



