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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक माणकचंद ‘भाईजी’ को पाली में दी गई श्रद्धांजलि

पाली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं पाथेय कण पत्रिका के संरक्षक माणकचंद जी ‘भाईजी’ के निधन के उपरांत सोमनाथ मंदिर मार्ग स्थित संघ कार्यालय परिसर में श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने उपस्थित होकर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

जिला संघचालक नेमीचंद अखावत ने बताया कि वक्ताओं ने ‘भाईजी’ के संगठनात्मक, बौद्धिक और वैचारिक योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा को समर्पित किया।

पूर्व प्रचारक विजय कृष्ण नाहर ने कहा कि माणकचंद जी की स्मरण शक्ति अद्वितीय थी और पाथेय कण के विकास में उनका योगदान 90 प्रतिशत तक माना जा सकता है। वे अंतिम समय तक कर्मशील, निष्ठावान और विनम्र बने रहे।

गौतम चंद यति ने ‘भाईजी’ को आत्मीय और स्नेहिल व्यक्तित्व बताते हुए कहा कि वे बाहर से आए कार्यकर्ताओं को भी परिवार जैसा अपनापन देते थे। उन्होंने जीवन भर संगठन के लिए कार्य किया, लेकिन कभी निजी अपेक्षा नहीं रखी।

प्रवीण कुमार त्रिवेदी ने उनकी सरलता और सहजता को याद करते हुए कहा कि वे स्वयंसेवकों और उनके परिजनों के नाम वर्षों बाद भी याद रखते थे और बिना संकोच उनके घर का भोजन ग्रहण करते थे।

उल्लेखनीय है कि माणकचंद जी ‘भाईजी’ का निधन 30 जुलाई को 83 वर्ष की आयु में जयपुर के एसएमएस अस्पताल में हुआ। उनका जन्म 2 नवंबर 1942 को नागौर जिले के कसारी-बड़ा गांव में हुआ था और वर्ष 1966 से वे पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में लगभग छह दशकों तक संघ कार्य में सक्रिय रहे।

Rajasthan Today

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