पाली : किसान सौर पम्पों से बन रहे आत्मनिर्भर, सिंचाई में मिल रही बड़ी राहत

पाली : जिले के किसान अब सौर ऊर्जा सिंचाई पम्प संयंत्रों को अपनाकर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहे हैं। प्रधानमंत्री किसान सौर ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम योजना) के घटक-बी के तहत स्थापित ये पम्प उन किसानों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं, जिनके खेतों में बिजली की सुविधा नहीं है या जहां विद्युतीकरण पर भारी खर्च आता है।
उप निदेशक उद्यान डॉ. मनोज अग्रवाल ने बताया कि सौर ऊर्जा एक स्वच्छ व नवीकरणीय ऊर्जा है, जो न केवल सिंचाई की लागत घटा रही है बल्कि प्रदूषण नियंत्रण में भी सहायक है। वर्तमान में पाली जिले के 1857 किसान सौर पम्पों से खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। वर्ष 2024-25 में 528 किसानों ने योजना का लाभ लिया, वहीं इस वर्ष जिले को 800 सौर पम्प स्थापित करने का लक्ष्य मिला है।

योजना के तहत किसानों को 60% तक का अनुदान मिल रहा है, जबकि शेष राशि में से 30% तक बैंक ऋण का प्रावधान है। विशेष वर्गों के किसानों को अतिरिक्त अनुदान भी दिया जा रहा है। जनजाति उपयोजना क्षेत्र के कृषकों को तो शत-प्रतिशत अनुदान उपलब्ध है।
किसानों का कहना है कि अब उन्हें समय पर सिंचाई उपलब्ध हो रही है और लागत घटने से आय में वृद्धि हो रही है। बाली निवासी बाबूलाल/जेठाराम ने बताया कि बिजली समय पर न मिलने से पहले फसल खराब हो जाती थी, लेकिन अब सौर पम्प से पैदावार बेहतर हो रही है। वहीं लाटाडा के किसान रतनलाल चौधरी ने कहा कि सौर पम्प से हर मौसम में फसल उत्पादन संभव हो पाया है।



