तेरापंथ धर्मसंघ ने आचार्य श्री जीतमल जी को किया नमन, पर्यूषण पर्व पर साधना व संयम का आह्वान

पाली : पर्यूषण पर्व के अवसर पर तेरापंथ धर्मसंघ ने अपने चतुर्थ आचार्य, आचार्य श्री जीतमल जी के महाप्रयाण दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। धर्मसंघ ने उनकी साधना, साहित्यिक योगदान और संगठात्मक अवदानों को स्मरण करते हुए कहा कि जयाचार्य की प्रेरणा से चरमोत्सव, पट्टोत्सव और मर्यादा महोत्सव जैसी गौरवशाली परंपराएँ आज भी संघ की पहचान बनी हुई हैं।

साध्वी श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि पर्यूषण पर्व आत्मावलोकन, आत्मशुद्धि और त्याग की यात्रा है। उन्होंने संयमित आहार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा – “जितना हम भोजन में संयम करेंगे, उतनी साधना सुदृढ़ होगी।” इस अवसर पर साध्वी ज्योतियश जी ने “अंतकृत दशा” पाठ का शुभारंभ कराया। साध्वी सुरभिप्रभा एवं राहतप्रभा जी ने भावसंगीत प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भावविभोर किया।

तेरापंथ सभा द्वारा मंगलाचरण उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। पूरे दिन भवन में जप, साधना और पर्यूषण कालीन आध्यात्मिक गतिविधियों का क्रम जारी रहा। प्रतिदिन शाम को सामूहिक प्रतिक्रमण का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु आत्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।



