पाली : आत्महत्या रोकथाम दिवस पर संगोष्ठी आयोजित, अवसादग्रस्त व्यक्तियों की शीघ्र पहचान व समय पर उपचार को बताया जरूरी

पाली : चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से बुधवार को आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर बांगड़ चिकित्सालय स्थित ए.एन.एम. प्रशिक्षण केन्द्र के सभाकक्ष में व्यापक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सौ से अधिक चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी, प्रशिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विकास मारवाल ने उद्घाटन भाषण में कहा कि समाज में मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति, विशेषकर अवसादग्रस्त लोगों की शीघ्र पहचान करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक अवस्था में मानसिक विकार की पहचान कर उचित परामर्श व समय पर चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध करवाने से आत्महत्या के खतरनाक विचारों से बचाया जा सकता है।

इस वर्ष विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस की थीम “Changing the Narrative on Suicide” पर बल देते हुए डॉ. मारवाल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य पर बनी मिथक और गलत धारणाओं को तोड़कर एक सकारात्मक समाज का निर्माण करना आज की सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने विशेष रूप से महिला रोगियों के प्रति देरी से उपचार मिलने की समस्या पर चिंता व्यक्त की और सभी स्वास्थ्यकर्मियों को सजग होकर कार्य करने का निर्देश दिया।
ए.एन.एम. प्रशिक्षण केन्द्र के प्रधानाचार्य के.सी. सैनी ने संगोष्ठी में बताया कि अवसादग्रस्त व्यक्ति से संवाद स्थापित कर उसकी मानसिकता में बदलाव लाना अति महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रेरणादायक जीवन वाक्य साझा किए, जिनसे रोगी को नया संकल्प लेने में सहायता मिल सके। प्रमुख वाक्यों में शामिल थे – अंधेरा चाहे कितना भी गहरा हो, सूरज की पहली किरण आशा की रोशनी लेकर आती है।, दुनिया में कितना ग़म है, मेरा ग़म कितना कम है।, समस्या चाहे कितनी भी बड़ी हो, आपका जीवन उससे कई गुना बड़ा है।

ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उजमा जबीन ने चिकित्सकों को निर्देशित किया कि संभावित आत्महत्या के संकेत मिलने पर रोगियों को तुरंत मनोरोग विशेषज्ञ के पास रेफर किया जाए। कार्यक्रम में ग्रामीण क्षेत्रों के चिकित्सक, जिला कार्यक्रम अधिकारी भवानी सिंह, नर्सिंग कर्मचारी, प्रशिक्षक पारसमल कुमावत, महेन्द्र कुमार, नत्थुलाल बामणिया समेत अन्य कर्मी भी सक्रिय रूप से शामिल रहे।

कार्यक्रम के अंत में के.सी. सैनी ने सभी स्वास्थ्यकर्मियों व उपस्थित जनों का आभार प्रकट किया। इस संगोष्ठी के माध्यम से आत्महत्या रोकथाम के क्षेत्र में स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका को और भी सशक्त बनाकर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया गया।



