कुरन में जलवायु अनुकूल खेती पर प्रशिक्षण, किसानों और महिलाओं को सिखाई गई जैविक खेती की तकनीकें

पाली/कुरन : ग्रामीण विकास विज्ञान समिति उपकेंद्र पाली द्वारा संचालित DHWG परियोजना के तहत अरटिया गांव में जलवायु अनुकूल खेती पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में ग्राविस से केंद्र समन्वयक करणाराम छापरिया और परियोजना समन्वयक श्यबाजखान पठान मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण में श्यबाजखान पठान ने किसानों को समझाया कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के लिए जैविक खेती सबसे कारगर उपाय है। उन्होंने बताया कि डीएपी और यूरिया जैसी रासायनिक खादों से जमीन की उर्वरक क्षमता प्रभावित होती है, जबकि जैविक खाद और जैविक दवाइयाँ फसल को पोषण देती हैं और मिट्टी को उपजाऊ बनाए रखती हैं।
उन्होंने ग्रामीणों को जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया भी सिखाई। इसके लिए 3×5 फीट का गड्ढा खोदकर उसमें आंवला/आकड़ा की पत्तियाँ, गोबर, नीम की पत्तियाँ, गोमूत्र आदि डालकर ढकने और 6 महीने तक पानी देते रहने की विधि बताई। तैयार खाद मिट्टी की तरह होकर खेत को उपजाऊ बनाती है।

प्रशिक्षण में ग्राविस द्वारा लगाए गए फलदार पौधों की यूनिट्स की जानकारी भी दी गई। पौधों की सही समय पर कटाई-छंटाई, देखभाल और खाद डालने के तरीकों को विस्तार से समझाया गया। साथ ही, खेतों में फसल उत्पादन रुकने पर अधिक से अधिक सड़ी हुई गोबर खाद डालने की सलाह दी गई।
करणाराम छापरिया ने ग्रामीणों को ग्राविस द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बारे में बताया, जिनमें टांका निर्माण, खड़ीन निर्माण, फलदार यूनिट्स, आउटरीच मेडिकल कैंप आदि शामिल हैं। उन्होंने आगे भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित करने पर जोर दिया।
प्रशिक्षण में आईएलजी और एसएचजी से जुड़ी महिलाओं व बालिकाओं ने भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। इनमें जोराराम, थावरी बाई, रमी बाई, सीता बाई, हाजरी बाई, फुली देवी, सवी बाई सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे। यह कार्यक्रम किसानों और ग्रामीण महिलाओं के लिए खेती को अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और लाभकारी बनाने की दिशा में एक सार्थक पहल साबित हुआ।



