अखिल भारतीय साहित्य परिषद पाली ने महर्षि वाल्मीकि जयंती पर आयोजित साहित्य संगोष्ठी में जीवन और काव्य रचना पर किया प्रकाश

पाली : आषापुरा नगर में मंगलवार को अखिल भारतीय साहित्य परिषद, पाली द्वारा आदि कवि महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर साहित्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संरक्षक साहित्यकार गोपीदास रामावत ने की, जबकि जिलाध्यक्ष भंवरसिंह राठौड़ चोटिला ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
संगोष्ठी में गोपीदास रामावत ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन हमें लक्ष्य निर्धारित कर एकनिष्ठ प्रयास करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बताया कि वाल्मीकि ने अपने कठिन साधना और लगन के बल पर ही रामायण जैसे महाकाव्य की रचना की। इस संदर्भ में उन्होंने वाल्मीकि की साधना कथा का उल्लेख किया कि कैसे वे ध्यानमग्न अवस्था में थे और उनके शरीर को दीमकों ने ढक लिया था। साधना पूरी कर जब वे दीमकों के घर (वाल्मीकि) से बाहर आए, तो लोग उन्हें वाल्मीकि कहने लगे।
संगोष्ठी में प्रांत मीडिया प्रमुख पवन पाण्डेय ने महर्षि वाल्मीकि को वैदिक काल की महान विभूतियों में गिना और उनके योगदान को भारतीय संस्कृति के लिए प्रेरणादायक बताया। इसके अलावा उपाध्यक्ष श्रीराम वैष्णव कोमल ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। संगोष्ठी में साहित्यकार सत्यनारायण राजपुरोहित पुनाड़िया, कवि दिलीप बच्चानी, नाथूसिंह राजपुरोहित, मनीष कुमार अनैतिक, जगदीशचंद्र ने विचार व्यक्त किए और काव्यपाठ किया। कार्यक्रम के अंत में जिलाध्यक्ष भंवरसिंह राठौड़ चोटिला के उप प्रधानाचार्य बनने पर साहित्यिक और शिक्षाविदों ने स्वागत और अभिनंदन किया। साहित्य संगोष्ठी ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन, साधना और काव्य रचना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित साहित्यिक और नागरिकों को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रेरणा दी।



