
पाली : पाली शहर स्थित नागा बाबा की बगीची में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में तीसरे दिन पूज्य गोवत्स राधा कृष्ण महाराज ने जीवन में गुरु की महत्ता, समय के सदुपयोग और धर्म की पुष्टि पर सारगर्भित प्रवचन दिया।
उन्होंने कहा कि जीवन के नियमों को सुदृढ़ करने के लिए गुरु का होना आवश्यक है। सच्चा गुरु वह है जो शिष्य को भौतिक नहीं बल्कि “समझ की कक्षा” में अग्रणी बनाता है, मन का भय दूर करता है और उसे हित-अहित का ज्ञान कराता है।
महाराजश्री ने कहा कि सुखदेव जी ने राजा परीक्षित से पूछा था कि समय का सर्वोत्तम उपयोग क्या है, तो परीक्षित जी ने उत्तर दिया कि “भगवान की कथा सुनना और उनके गुणों का गान करना ही सर्वोत्तम कार्य है।”

उन्होंने कहा कि हर मनुष्य को यह जानना चाहिए कि उसका जन्म क्यों हुआ है, उसका उद्देश्य और उपयोगिता क्या है। ब्रह्मा जी ने भी कहा था कि पृथ्वी की रक्षा और विस्तार के लिए गौ माता की सेवा, गोमूत्र और गोबर का महत्व असीम है। जो लोग गौसेवा करते हैं उन्हें भगवान सहज बुद्धि प्रदान करते हैं।
महाराजश्री ने कहा कि बच्चों को अपने पूर्वजों के त्याग, समर्पण और गौरवपूर्ण इतिहास से अवगत कराना चाहिए ताकि उनमें भी वही संस्कार विकसित हों। उन्होंने बताया कि कथा सुनने का सार तभी है जब व्यक्ति के स्वभाव और चरित्र में सुधार आए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा जैसे भोजन करने के बाद पाचन क्रिया अपना कार्य करती है, वैसे ही कथा सुनने के बाद व्यक्ति के स्वभाव में परिवर्तन होना चाहिए। महाराजश्री ने कहा कि मनुष्य को कामवासना की पूर्ति के लिए नहीं, बल्कि धर्म की पुष्टि के लिए विवाह करना चाहिए। परमेश्वर जोशी ने बताया कि भागवत कथा प्रतिदिन सुबह 9 से 12 बजे तक आयोजित की जा रही है। शनिवार की कथा में अनेक श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

आज की कथा में प्रमुख रूप से पूर्व विधायक ज्ञानचंद पारख, कमल किशोर गोयल, रामगोपाल सराफ, संजय सराफ, अनुमान प्रसाद हुबली, शंकरलाल गोटिया, चेतन ढाणावत, मधुसूदन फतेहपुर, गंगाविशन सारंडा, विकास नागोरी, गोपाल सोजतिया, प्रकाश कंवर, लक्ष्मी शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे एवं आरती का लाभ प्राप्त किया।



