समीक्षा की भारतीय दृष्टि’ पुस्तक को राष्ट्रीय स्तर पर मिली सराहना, 61 विद्वानों की कृतियों का सार प्रस्तुत

पाली : अखिल भारतीय साहित्य परिषद जोधपुर प्रांत के प्रचार प्रमुख एवं साहित्यकार पवन कुमार पाण्डेय द्वारा लिखित पुस्तक ‘समीक्षा की भारतीय दृष्टि’ इन दिनों साहित्य जगत में विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है। पाण्डेय ने इस पुस्तक में देशभर के 61 प्रतिष्ठित विद्वानों की कृतियों का अध्ययन कर उनकी समीक्षाओं को एक सुव्यवस्थित रूप में पाठकों के सामने प्रस्तुत किया है।
पाठकों की बदलती रुचि को ध्यान में रखकर तैयार की गई पुस्तक
लेखक पवन पाण्डेय ने बताया कि आधुनिक समय के पाठक लंबी रचनाओं की बजाय संक्षिप्त लेकिन सारगर्भित जानकारी पसंद करते हैं। इसी बदलते पाठकीय रुझान को देखते हुए उन्होंने विभिन्न विधाओं जैसे धर्म, योग, पत्रकारिता, नैतिकता, जीवन दर्शन, राजनीति आदि विषयों पर आधारित पुस्तकों को पढ़कर एक विशिष्ट समीक्षा संग्रह तैयार किया है।
पुस्तक की भूमिका एवं प्रस्तावना साहित्य जगत की कई बड़ी हस्तियों ने लिखी है प्रो. संजय द्विवेदी, पूर्व महानिदेशक, भारतीय जनसंचार संस्थान, सूचना व प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, डॉ. दिनेश प्रताप सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, डॉ. जितेन्द्र कुमार सिंह संजय, कवि एवं साहित्यकार, डॉ. सुशीलचंद्र त्रिवेदी मधुपेश, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समीक्षा दृष्टि जिलाध्यक्ष भवंरसिंह राठौड़ (चोटिला) ने बताया कि इस पुस्तक के प्रेरणास्रोत राष्ट्रीय संगठन मंत्री मनोज कुमार हैं, जिनकी प्रेरणा से यह महत्वपूर्ण कार्य संभव हो पाया।
पुस्तक के प्रकाशन पर कई साहित्यकारों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रसन्नता व्यक्त की है। इनमें प्रमुख रूप से—
राजेंद्र सिंह भाटी, डॉ. शिवेश प्रताप, डॉ. राघवप्रसाद पाण्डेय, ओम चतुर्वेदी, शैल चतुर्वेदी, कवयित्री तृप्ति पाण्डेय, गोपीदास रामावत, मनीष कुमार अनैतिक, सत्यनारायण राजपुरोहित, श्रीराम वैष्णव कोमल, दिलीप बच्चानी, संजय चतुर्वेदी, मयंक तिवारी, मांगूसिंह दूदावत, संदीप वैष्णव, नाथूसिंह राजपुरोहित सहित अनेक साहित्य प्रेमी शामिल हैं।
‘समीक्षा की भारतीय दृष्टि’ न केवल विभिन्न विधाओं की पुस्तकों का सार प्रस्तुत करती है, बल्कि यह आज के पाठकों के लिए एक संक्षिप्त, सरल और ज्ञानवर्धक मार्गदर्शिका के रूप में भी उभर रही है।



