पाली : भारतीय भाषा दिवस पर आयोजित विचार-काव्य गोष्ठी, साहित्य और संस्कृति के रंग से सजा कार्यक्रम

पाली : भारतीय भाषा दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद, पाली द्वारा जोधपुर प्रांत प्रचार प्रमुख पवन पाण्डेय के मुख्य आतिथ्य में विचार-काव्य गोष्ठी का आयोजन आशापुरा नगर स्थित पं. विष्णुप्रसाद चतुर्वेदी सभागार में किया गया। कार्यक्रम में जिले के साहित्यकारों और भाषा प्रेमियों ने अपने उत्कृष्ट काव्य और विचारों से उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जिलाध्यक्ष भंवरसिंह राठौड़ ने बताया कि गोष्ठी का शुभारंभ कवि श्रीराम वैष्णव कोमल द्वारा सरस्वती वंदना ‘हे मां स्वर दे…’ से हुआ। इसके बाद साहित्यकार पवन पाण्डेय ने तमिल कवि भरतियार की प्रमुख कविता ‘प्रकाश की सेना उठो उठो, रोशनी की सेना’ के माध्यम से अपने विचार साझा किए। उन्होंने अंधकार से लड़ने और विश्व में प्रकाश फैलाने का संदेश दिया।
भारतीय भाषा दिवस भरतियार के जन्मदिवस पर मनाया जाता है। भरतियार ने अपनी कविताओं और लेखनी के माध्यम से देश की विभिन्न संस्कृतियों और भाषाओं को जोड़ने का कार्य किया। युगदृष्टा भारती के विचारों के अनुसार, भाषा न केवल संवाद का माध्यम है बल्कि समाज और व्यक्ति की पहचान बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कार्यक्रम में कई कवियों ने अपनी भाषाई प्रतिभा का प्रदर्शन किया: श्रीराम वैष्णव कोमल ने जीवन यात्रा और कठिनाइयों को चित्रित करती हुई कविता प्रस्तुत की। नाथूसिंह राजपुरोहित ने श्रम और परिश्रम की महत्ता पर आधारित कविता सुनाई। प्रवीण त्रिवेदी ने संस्कृत में गीत ‘वंदे त्वां भूदेवी आर्य मातरम्’ की प्रस्तुति दी। दिलीप बच्चानी ने सिंधी भाषा में अपनी कथा आधारित कविता सुनाकर गोष्ठी की बहुभाषीयता को समृद्ध किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन कवि मनीष कुमार अनैतिक ने किया। गोष्ठी ने भारतीय भाषाओं के महत्व, मातृभाषा की आवश्यकता और साहित्यिक सौंदर्य को उभारते हुए सभी उपस्थित साहित्य प्रेमियों को प्रेरित किया।
गोष्ठी में पाली और आसपास के क्षेत्र के साहित्यकार, विद्यार्थी और भाषा प्रेमी उपस्थित रहे, जिन्होंने बहुभाषीय कविताओं और विचारों का आनंद लिया और भारतीय भाषाओं के संरक्षण और प्रचार की आवश्यकता पर जोर दिया।



