सराणा में श्रद्धांजलि सभा: राजपुरोहित महासभा के सैकड़ों पदाधिकारियों ने दिवंगत बबरी देवी को अर्पित किए श्रद्धा सुमन, संगठन विस्तार पर हुआ मंथन

पाली : दिव्य संत श्री खेताराम जी महाराज के पुस्तैनी गांव सराणा में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में राजपुरोहित महासभा के सैकड़ों पदाधिकारी शामिल हुए। यह सभा संत श्री खेताराम जी के परिवार के देव लोक गमन हुए सदस्य स्वर्गीय बबरी देवी, धर्मपत्नी हड़मान सिंह (पुत्र—हुकमा जी) की स्मृति में आयोजित की गई।
प्रदेश अध्यक्ष जबर सिंह राजपुरोहित के नेतृत्व में महासभा पदाधिकारियों ने स्वर्गीय बबरी देवी को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उनके मानव समाज के प्रति त्याग, सेवा और समर्पण को स्मरण किया।
सभा के मुख्य वक्ता जबर सिंह राजपुरोहित ने कहा कि दिव्य संत श्री खेताराम जी की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक जीवन यात्रा पर आधारित “दिव्य संत श्री खेतेश्वर का इतिहास” जैसे शोध ग्रंथ का सृजन कर उसे समाज को समर्पित कराने तथा राष्ट्रव्यापी राजपुरोहित महासभा के स्वरूप को साकार करने में हुकमा जी, उनके सुपुत्र हड़मान सिंह और धर्मपत्नी बबरी देवी का योगदान अविस्मरणीय है। उनका त्याग आने वाले समय में समाज के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा।
श्रद्धांजलि सभा के पश्चात आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में संगठन विस्तार को लेकर महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई। सर्वसम्मति से राष्ट्रव्यापी संगठन विस्तार का प्रस्ताव पारित किया गया।
जिला प्रभारी अंबालाल अलबेला ने महासभा को राष्ट्रव्यापी स्वरूप देने के लिए सामूहिक प्रयास पर जोर दिया।
प्रदेश महामंत्री डूंगर सिंह बांकियावास ने वर्ष 2026 को “संगठन वर्ष” घोषित करने का सुझाव दिया। वहीं बालोतरा जिलाध्यक्ष देराम सिंह मनणा (जसोल) एवं बाड़मेर जिलाध्यक्ष खुमान सिंह बोथिया ने सीमावर्ती एवं बड़े जिलों के पुनर्गठन कर छोटे जिले बनाने का सुझाव दिया, जिससे संगठन संचालन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
बैठक को संगठन महामंत्री जगदीश सिंह सिहा, मदन सिंह रमणिया, रणजीत सिंह पचपदरा, प्रदेश प्रतिनिधि जोरावर सिंह अर्थदंडी, बख्तावर सिंह सराणा, एडवोकेट अशोक सिंह अर्थदंडी, मंडल अध्यक्ष खंगार सिंह उदेश, महिला जिलाध्यक्ष सोहन कंवर, कविता कंवर गुड़ा नाल, माया राजपुरोहित रमणिया, दिव्या राजपुरोहित, पुखराज गुड़ा नाल, भंवर सिंह चांदेसर, हरि सिंह भंवरिया की ढाणी, अर्जुन सिंह जैतपुर, मदन सिंह भैसेर सहित अनेक वक्ताओं ने संबोधित किया।
कार्यक्रम का समापन दिव्य संत श्री खेताराम जी के मूल सिद्धांतों पर चलकर समाज को संगठित और सशक्त बनाने के संकल्प के साथ हुआ।



