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खेरवा में राष्ट्रवीर राव चांपाजी राठौड़ की 613वीं जयंती श्रद्धा व शौर्य के साथ मनाई गई, हजारों समाज बंधु हुए शामिल

पाली : राष्ट्रभक्त, कर्तव्यपरायण, पितृभक्त एवं गोरक्षक राव चांपाजी राठौड़ की 613वीं जयंती समारोह का आयोजन श्री जोरजी चांपावत विकास समिति के तत्वावधान में श्री जोरजी चांपावत स्मारक, खेरवा में भव्य रूप से किया गया। समारोह में राजस्थानभर से राजपूत समाज के बंधु एवं मातृशक्ति बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में उदय सिंह रणसीगांव ने राव चांपाजी राठौड़ एवं चांपावत वंश के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राव चांपाजी राठौड़ का जन्म नाडोल में हुआ था। वे जोधपुर के संस्थापक राव जोधाजी के बड़े भ्राता थे। पिताजी राव रिडमलजी की आज्ञा पर उन्होंने स्वयं शासन त्याग कर छोटे भाई राव जोधाजी को मारवाड़ का शासक बनाया, जो त्याग और कर्तव्य का अनुपम उदाहरण है।

उन्होंने बताया कि राव चांपाजी राठौड़ ने कापरडा गांव की स्थापना की तथा अपने जीवन में 52 युद्ध लड़े और सभी में विजय प्राप्त की। उन्होंने विक्रम संवत 1522 में सुल्तान महमूद खिलजी से लोहा लिया, जिससे उनकी राष्ट्रभक्ति और वीरता का परिचय मिलता है।

रतन सिंह रणसीगांव ने समाजजनों से परिवार सहित जयंती समारोह में भाग लेने और पूर्वजों के पदचिन्हों पर चलने का आह्वान किया। दीपसिंह धणानी ने आगरा स्थित बल्लुजी चांपावत के घोड़े के स्मारक के संरक्षण व विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।

पूर्व विधायक खुशवीर सिंह जोजावर ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद राजपूत समाज के विरुद्ध सुनियोजित षड्यंत्रों के तहत भ्रम फैलाया गया, जिसे समाज को समझना होगा। सिद्धार्थ सिंह रोहट ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए विरासत संरक्षण को समय की आवश्यकता बताया।
समुद्र सिंह बांता ने चांपावत वंश की ऐतिहासिक यात्रा बताते हुए कहा कि पहले झीतड़ा, फिर मणिहारी, कापरडा और अब खेरवा में जयंती मनाई जा रही है। स्मारक निर्माण पूर्ण होने के बाद जयंती नाडोल में मनाने की घोषणा की गई।

कार्यक्रम के दौरान खेरवा–मारवाड़ जंक्शन–हिंगोला चौराहा का नामकरण श्री जोरजी चांपावत के नाम पर करने एवं आदमकद अश्वारोही प्रतिमा स्थापित करने की मांग की गई। इस अवसर पर जोगेंद्र सिंह हेमावास ने स्मारक परिसर में कक्ष निर्माण की घोषणा की, वहीं भाटी परिवार, खेरवा ने जयंती समारोह में भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी ली।

व्यवस्थाओं में विभिन्न समाजसेवियों द्वारा भोजन, जल, चाय, प्रचार-प्रसार, मंच, टेंट, लाइट-साउंड, वाहन एवं लाइव प्रसारण की जिम्मेदारियां निभाई गईं। समारोह में भामाशाहों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम के अंत में समिति अध्यक्ष मालम सिंह हेमावास एवं मीडिया प्रभारी के.पी. सिंह बांता ने सभी आगंतुकों, अतिथियों एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया।

Rajasthan Today

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