google.com, pub-3021598506696014, DIRECT, f08c47fec0942fa0
Paliदेशब्रेकिंग न्यूज़राजस्थानराज्य

पाली में आध्यात्मिक इतिहास रच रहा महामहोत्सव, भैरव महाकथा में उमड़ा जनसैलाब, गुरुदेव के आह्वान पर हजारों ने लिया अपशब्द त्याग का संकल्प

पाली : अणुव्रत नगर के विशाल प्रांगण में कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरी महाराज के सानिध्य में चल रहे आध्यात्मिक महामहोत्सव में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या नए रिकॉर्ड बना रही है। प्रातःकालीन साधना, दोपहर में समृद्धि दाता महालक्ष्मी महायज्ञ तथा रात्रि में भैरव पुराण महाकथा में श्रद्धालुओं का अपार उत्साह देखने को मिल रहा है।

मंगलवार को भैरव महाकथा की शुरुआत करते हुए जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरी महाराज ने श्रद्धालुओं को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सनातन संस्कृति के लिए गौरव का विषय है कि अब भारत सरकार भी सिद्ध सनातन परंपराओं और उनके पौराणिक महत्व को स्वीकार कर रही है। उन्होंने बताया कि भारत की रक्षा प्रणाली में सर्वशक्तिमान भैरव देव की शक्ति को मान्यता दी गई है और भारतीय सेना में भैरव बटालियन का गठन किया गया है।

गुरुदेव ने बताया कि भैरव बटालियन में ऐसे विशेष प्रशिक्षित कमांडो तैनात किए गए हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में धैर्यपूर्वक देश की रक्षा करते हुए शत्रु का समूल नाश करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी कुल 25 भैरव बटालियन तैयार की जा रही हैं, जो दुर्गम क्षेत्रों में भारत की आंतरिक एवं सीमा सुरक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तत्पर रहेंगी। बटालियन का ध्येय वाक्य एवं प्रतीक चिन्ह भी शिव के उग्र रूप भैरव के पौराणिक स्वरूप पर आधारित है।

कथा के दौरान गुरुदेव ने सनंदन मुनि द्वारा भगवान नरसिंह की तपस्या तथा भोले शिकारी को नरसिंह दर्शन के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान सदैव भोले और निष्कपट भक्तों को ही दर्शन देते हैं। उन्होंने कहा कि धन से दरिद्र होना समझ में आता है, लेकिन मन से दरिद्र होना सबसे बड़ा अभाव है। सकारात्मक सोच से आभामंडल सुदृढ़ होता है और समृद्धि बढ़ती है, जबकि नकारात्मकता से अर्जित धन भी गलत दिशा में व्यय होता है।

पूर्व उद्घोषणा के अनुसार गुरुदेव ने श्रद्धालुओं से 50 मिली सरसों तेल मंगवाया और गुप्त मंत्रों से उसे सिद्ध किया। इसके पश्चात श्रद्धालुओं को वर्षों पुराने शारीरिक दर्द पर अल्प मात्रा में तेल लगाने को कहा गया। इसके बाद पांडाल में चमत्कारिक दृश्य देखने को मिला, जब सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने मंच पर आकर अपने दर्द से राहत मिलने के अनुभव साझा किए। कथा पांडाल जयकारों और तालियों की गूंज से भर उठा।

गुरुदेव ने पाली क्षेत्र में प्रचलित अपशब्दों पर चिंता जताते हुए कहा कि अपशब्द न केवल व्यक्ति बल्कि पूरे परिवार, समाज और नगर के वातावरण में नकारात्मकता फैलाते हैं। उन्होंने पाली को सुखी, शांत और समृद्ध बनाने के लिए भाषा से अपशब्दों को सदा के लिए त्यागने का आह्वान किया। इस पर हजारों श्रद्धालुओं ने हाथ उठाकर गुरुदेव की साक्षी में अपशब्द न बोलने का संकल्प लिया, जिससे पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

बुधवार को सभी श्रद्धालुओं के लिए सर्व कष्ट निवारक डोरा सिद्ध किया जाएगा। इसके लिए श्रद्धालुओं को एक मीटर लाल डोरा साथ लाने का आग्रह किया गया है। पांडाल में गुरुदेव द्वारा भैरव रक्षा कवच एवं सर्व कार्य सिद्धि हेतु अभिष्ट मंत्रोच्चार के साथ डोरे में 27 गांठें लगवाई जाएंगी।

Rajasthan Today

Related Articles

Back to top button