पर्यावरण हित में गोकाष्ठ से होलिका दहन करें, कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत का प्रदेशवासियों से आह्वान

जयपुर : पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने रंगों और उल्लास के पावन पर्व होली के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में प्रेम, सौहार्द और सकारात्मकता के नए रंग लेकर आए तथा बुराइयों का नाश कर सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करे।
इस अवसर पर मंत्री कुमावत ने पर्यावरण संरक्षण और गोसंवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए इस बार होलिका दहन में गोकाष्ठ (गाय के गोबर से निर्मित लकड़ी) के उपयोग का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ और हरा-भरा पर्यावरण मानव जीवन का मूल आधार है। इसी सोच के साथ यदि होलिका दहन गोकाष्ठ से किया जाए तो यह न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक होगा, बल्कि गोसंवर्धन के पुण्य से भी जुड़ा एक सार्थक प्रयास सिद्ध होगा। मंत्री कुमावत ने बताया कि गोकाष्ठ एक जैविक ईंधन है जो पारंपरिक लकड़ी की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल है। इसके उपयोग से:
कम धुआं निकलता है, कार्बन उत्सर्जन कम होता है, प्रदूषण लकड़ी की तुलना में लगभग 35 प्रतिशत तक घटता है
विशेषज्ञों के अनुसार गोकाष्ठ का धुआं वातावरण को प्रदूषित करने के बजाय उसे शुद्ध करने में सहायक माना जाता है। साथ ही यह लकड़ी की तुलना में अधिक तेजी से जलता है। उन्होंने यह भी बताया कि गोकाष्ठ के दहन के बाद बची हुई राख भी अत्यंत उपयोगी होती है। इसे बगीचे या खेतों में डालने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है तथा यह प्राकृतिक कीटनाशक का कार्य भी करती है।
मंत्री कुमावत ने कहा कि यदि गोकाष्ठ उपलब्ध न हो तो लकड़ी के स्थान पर गाय के गोबर से बने कंडों का उपयोग कर होलिका दहन किया जा सकता है। इससे गोसंरक्षण और पर्यावरण संरक्षण दोनों के प्रति हमारी जिम्मेदारी निभाई जा सकेगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि इस होली परंपरा के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का संकल्प भी लें, जिससे भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।



