जोधपुर : दशहरे पर रावण दहन की धूम, वहीं वंशजों के घर में शोक और पूजा का अनोखा दृश्य

जोधपुर : सूर्यनगरी जोधपुर में इस वर्ष भी दशहरा पर्व पर बुराई के प्रतीक रावण का दहन पारंपरिक धूमधाम और उत्साह के साथ किया जाएगा। शहर में जगह-जगह विशाल पुतलों की तैयारी चल रही है और वातावरण उल्लास से भरा हुआ है। मगर इसी उत्सव के बीच एक अनोखा और भावनात्मक दृश्य भी देखने को मिलेगा—जहां कुछ परिवारों में इस दिन को शोक और श्रद्धा के रूप में मनाया जाता है।
रावण के वंशज पंडित कमलेश दवे और अजय दवे ने बताया कि वे हर साल की तरह इस बार भी रावण दहन कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। उनका मानना है कि रावण केवल सीता हरण की घटना के लिए दोषी था, लेकिन वह एक महान पंडित, ज्योतिषाचार्य, वैज्ञानिक और शास्त्रों का विद्वान था। इसलिए उनके परिवार में दशहरे के दिन रावण की स्मृति में विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

दवे परिवार ने बताया कि रावण दहन के बाद वे विधिपूर्वक स्नान, जनेऊ परिवर्तन और मंत्रोच्चारण के साथ भगवान शिव और रावण की विशेष पूजा करते हैं। यह परंपरा उनके परिवार में पीढ़ियों से चली आ रही है।
गौरतलब है कि जोधपुर को रावण का ससुराल माना जाता है, जहां उनका विवाह हुआ था। यहां गोधा श्रीमाली ब्राह्मण समुदाय के रूप में रावण के वंशज सदियों से निवास कर रहे हैं और रावण को कुलदेवता के रूप में पूजते हैं। रावण के प्रति श्रद्धा का यह भाव केवल जोधपुर तक सीमित नहीं है—देशभर में कई स्थानों पर रावण के मंदिर हैं, जहां आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।
इस प्रकार दशहरे के दिन जोधपुर में एक ओर जहां बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया जाएगा, वहीं दूसरी ओर कुछ परिवारों में अपने पूर्वज के प्रतीक रावण के दहन पर शोक और पूजा का वातावरण रहेगा। यह अनोखा विरोधाभास भारतीय समाज की विविधता, परंपरा और सहिष्णुता का प्रतीक बन गया है।




