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पाली : आध्यात्मिक कुंभ का भव्य शुभारंभ, जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरी की पावन निश्रा में गूंजे वैदिक मंत्र

पाली : अंचल की खुशहाली, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के उद्देश्य से कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरी जी महाराज की पावन निश्रा में शनिवार को पाली के अणुव्रत नगर ग्राउंड में नौ दिवसीय आध्यात्मिक कुंभ का भव्य शुभारंभ पौराणिक परंपराओं और वैदिक विधि-विधान के साथ किया गया। प्रथम दिवस से ही साधना स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।

प्रातःकाल से ही साधना शिविर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं। जैसे ही ढोल-नगाड़ों के साथ जगद्गुरु देव का दिव्य आगमन हुआ, पूरा महोत्सव परिसर गुरुदेव की जय-जयकार से गूंज उठा। इसके पश्चात गुरुदेव वसंत विजयानंद गिरी जी महाराज ने साधना स्थल पर विराजित देवी-देवताओं की पूर्ण विधि से पूजा-अर्चना की।

पूजन उपरांत गुरुदेव ने साधना में उपस्थित श्रद्धालुओं को साधना के रहस्यों, मंत्रों की शक्ति एवं उनके आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से बताया। कई श्रद्धालुओं के हाथों में समृद्धि आकर्षित करने वाले जीबू कॉइन एवं पायरेट लक्ष्मी यंत्र रहे, जिनकी सिद्धि की प्रक्रिया प्रारंभ करवाई गई। साथ ही गुरुदेव ने कष्ट निवारण के चमत्कारी उपाय भी श्रद्धालुओं को बताए।

दोपहर पश्चात जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरी जी महाराज के सान्निध्य में काशी से पधारे 51 विद्वान पंडितों की उपस्थिति में महालक्ष्मी महायज्ञ का विधिवत शुभारंभ किया गया। यज्ञ की प्रत्येक आहुति गुरुदेव के श्रीमुख से उच्चारित दुर्लभ मंत्रों के साथ दी गई। यज्ञ में गाय के शुद्ध देसी घी, लाल-पीले-सफेद चंदन, औषधियां एवं दुर्लभ जड़ी-बूटियों सहित हजारों दिव्य आहुतियां अर्पित की गईं। प्रथम दिवस का यज्ञ लगभग ढाई घंटे तक चला।

रात्रि काल में श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के श्रीमुख से भैरव कथा का भाव-विभोर होकर श्रवण किया। यज्ञशाला में स्थापित 1008 समृद्धि कलश श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। ये कलश नवरात्रि महा महोत्सव यज्ञ अनुष्ठान के दौरान इंदौर एवं उदयपुर में करोड़ों आहुतियों और लाखों कुंकुमार्चनों से सिद्ध किए गए हैं, जिनमें 32 उपरत्न, 32 हीलिंग जेम स्टोन, नव रत्न, पंचधातु, 154 दुर्लभ औषधियां, करोड़ों मंत्रों से सिद्ध दिव्य पंचमुखी रुद्राक्ष सहित अनेक दिव्य वस्तुएं स्थापित हैं। कथा पांडाल में भगवान भैरव के अष्ट रूपों एवं मां लक्ष्मी व पद्मावती के विविध स्वरूपों की विशाल प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को भावविभोर कर रही हैं।

नौ दिवसीय इस दिव्य आध्यात्मिक महोत्सव में भाग लेने के लिए राजस्थान सहित मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब एवं गुजरात सहित विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओं के आने का क्रम लगातार जारी है। प्रतिदिन बढ़ती भीड़ इस महोत्सव की दिव्यता और भव्यता को दर्शा रही है।

Rajasthan Today

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