पाली में सनातन महोत्सव ने रचा इतिहास, भैरव कथा में उमड़ी रिकॉर्डतोड़ भीड़, हरिकेश–दंडपाणि भैरव प्रसंग से भावविभोर हुए श्रद्धालु

पाली : पाली नगर में सनातन संस्कृति के किसी आयोजन में शायद ही पहले कभी इतनी विशाल और ऐतिहासिक भीड़ देखने को मिली हो, जितनी इन दिनों कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरू वसंत विजयानंद गिरी महाराज के दर्शन एवं सानिध्य में आयोजित आध्यात्मिक महामहोत्सव में उमड़ रही है। सुबह की साधना, दोपहर में समृद्धि दाता महालक्ष्मी महायज्ञ और रात्रि में भैरव कथा के दौरान धर्मप्रेमियों का जनसैलाब उमड़ रहा है।

बुधवार रात्रि भैरव कथा में जगद्गुरू वसंत विजयानंद गिरी महाराज ने हरिकेश की अद्भुत शिव भक्ति का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। गुरूदेव ने बताया कि भैरव के 64 स्वरूप हैं और दंडपाणि भैरव उनमें एक विलक्षण स्वरूप हैं। कथा के अनुसार कुबेर देव के यक्ष रामदेव के पुत्र गुणभद्र को संतान नहीं थी। शिव की घोर तपस्या से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसका नाम हरिकेश रखा गया। बाल्यकाल से ही शिवभक्ति में रमे हरिकेश ने सांसारिक बंधनों से ऊपर उठकर प्रभु शिव की आराधना को ही जीवन का लक्ष्य बना लिया।

गुरुकुल के स्थान पर शिव भक्ति में लीन रहने से पिता के क्रोध और ताड़ना से व्यथित होकर हरिकेश घर छोड़कर निर्जन वन में चला गया। घोर अंधकार और भय के बीच उसने स्वयं को शिव की शरण में समर्पित कर दिया। हरिकेश की निष्कलुष भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे साक्षात काशी नगरी में दर्शन दिए। मणिकर्णिका श्मशान में वर्षों की कठोर तपस्या के पश्चात मां पार्वती की कृपा से भगवान शिव ने हरिकेश को दण्डनायक भैरव बनने का वरदान प्रदान किया। तभी से वह दंडपाणि भैरव के नाम से प्रसिद्ध हुए, जिनका मंदिर आज भी काशी में काल भैरव मंदिर के समीप स्थित है।
कथा के दौरान जगद्गुरू देव ने माता की महिमा का भी विस्तार से वर्णन किया। साथ ही श्रद्धालुओं के हाथों सर्व कष्ट निवारक लाल डोरे सिद्ध करवाए गए। अभिष्ट मंत्रोच्चार के साथ लगभग 30 मिनट की विधि में डोरे पर 27 गांठें लगवाई गईं, जिससे पांडाल मंत्रोच्चार और आस्था के स्वर से गूंज उठा।

जगद्गुरू वसंत विजयानंद गिरी महाराज ने जानकारी दी कि शुक्रवार को कथा में श्रद्धालुओं द्वारा लाए गए सिक्कों को दुर्लभ मंत्रों से अभिमंत्रित किया जाएगा। श्रद्धालुओं को पांच सिक्के, लाल कपड़ा और डोरा साथ लाने का आह्वान किया गया है। गुरूदेव ने बताया कि सिद्ध सिक्कों को घर के धन स्थान पर रखने से समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।



