इस्कॉन पाली में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया नित्यानंद त्रयोदशी महोत्सव, छप्पन भोग व महाआरती का आयोजन

पाली : अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) पाली द्वारा शनिवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ नित्यानंद त्रयोदशी महोत्सव मनाया गया। इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर भगवान नित्यानंद प्रभु की दिव्य लीलाओं का श्रवण एवं स्मरण किया।

इस्कॉन पाली के कार्तिक कृष्ण प्रभुजी ने जानकारी देते हुए बताया कि नित्यानंद प्रभु के प्राकट्य दिवस के उपलक्ष्य में सभी भक्तों द्वारा दोपहर 12 बजे तक उपवास रखा गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 10 बजे हरे कृष्ण महामंत्र के सामूहिक कीर्तन से हुई। इसके पश्चात नित्यानंद प्रभु का पंचतत्वों से भव्य अभिषेक किया गया।
अभिषेक के उपरांत भक्तों द्वारा प्रेमपूर्वक तैयार किया गया छप्पन भोग भगवान को अर्पित किया गया। कथा प्रवचन के दौरान कार्तिक कृष्ण प्रभुजी ने नित्यानंद प्रभु के अवतार, उनकी महिमा एवं लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि नित्यानंद त्रयोदशी विशेष पर्व है, क्योंकि इसी दिन सदैव आनंद में रहने और आनंद प्रदान करने वाले भगवान बलरामजी ने नित्यानंद प्रभु के रूप में अवतार लिया था।

उन्होंने बताया कि नित्यानंद प्रभु का जन्म लगभग सन् 1474 में पश्चिम बंगाल के एकाचक्र ग्राम में हुआ था। उनके जन्मस्थान पर स्थित गर्भास्व मंदिर आज भी श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख तीर्थस्थल है। उनके पिता हदाई पंडित एवं माता पद्मावती धर्मनिष्ठ ब्राह्मण थे। बाल्यकाल से ही उनकी भक्ति, वैष्णव भजन और आध्यात्मिक प्रतिभा प्रकट होने लगी थी।
प्रवचन में बताया गया कि चैतन्य महाप्रभु द्वारा स्थापित संकीर्तन आंदोलन में नित्यानंद प्रभु ने अहम भूमिका निभाई। उनका स्वरूप भगवान बलराम के समान श्वेत, वाणी मधुर और करुणा से परिपूर्ण था। वे सदैव श्रीकृष्ण की महिमा का गुणगान करते हुए भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करते थे।

कार्यक्रम के दौरान विशेष महाआरती, 56 भोग तथा नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान के अवतारों और उनकी महिमा का भावपूर्ण मंचन किया गया। अंत में सभी पधारे श्रद्धालुओं ने प्रसादम् ग्रहण किया। श्रद्धालुओं ने इस दिव्य आयोजन में भाग लेकर भगवान नित्यानंद प्रभु की कृपा एवं दिव्य लीला रस का आनंद प्राप्त किया।



