
पाली : पाली में आयोजित भैरव कथा ने धर्मोत्सवों के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरू वसंत विजयानंद गिरी महाराज के श्रीमुख से सातवें दिन भैरव कथा श्रवण के लिए विशाल जनसमुदाय उमड़ पड़ा। पाली में किसी भी धार्मिक आयोजन में पहली बार इतनी विराट भीड़ देखने को मिली।
जगद्गुरू महाराज ने भैरव तत्व की महिमा बताते हुए कहा कि अखिल ब्रह्मांड के 33 कोटि देवताओं में केवल भैरव ही सर्वज्ञ और सर्वशक्तिमान हैं। भैरव प्राणों के अधिष्ठाता देव हैं। ‘भयरहित करणम इति भैरवम्’—जो भय का नाश करें, वही भैरव हैं।

कथा के दौरान महाराज ने सूर्यदेव, उषा देवी, छाया और शनि देव से जुड़ा अद्भुत एवं दुर्लभ प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार छाया देवी ने अपने पुत्र को सर्वगुण संपन्न बनाने के लिए भैरव देव की शरण ली। भैरव मंडल की दिव्यता, अष्टभैरवों द्वारा महाभैरव की रक्षा और स्वयं यमराज का भैरव सेवा में लीन होना—इन प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

जगद्गुरू महाराज ने बताया कि छाया देवी के पुत्र ने भैरव देव के एकमात्र शिष्य के रूप में 40 लाख वर्षों तक तप, साधना और शिक्षा प्राप्त की। गुरुदक्षिणा में शिष्य द्वारा अपना शीश अर्पित करने की कथा सुनकर पांडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। भैरव देव की कृपा से शिष्य पुनर्जीवित हुए और वही आगे चलकर नवग्रहों में शनि देव के रूप में प्रतिष्ठित हुए।
कथा में यह भी बताया गया कि भैरव देव की कृपा से शनि देव भक्तों पर विशेष अनुग्रह करते हैं और भैरव नाम जप करने वाले जातकों को शनि के कोप से मुक्ति मिलती है।

कथा के दौरान कर्णप्रिय भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। इसी अवसर पर जगद्गुरू वसंत विजयानंद गिरी महाराज ने विधि-विधान से हजारों श्रद्धालुओं को गुरु दीक्षा प्रदान की। उन्होंने स्पष्ट घोषणा की कि वे गुरुदक्षिणा में किसी प्रकार की धनराशि या वस्तु स्वीकार नहीं करते। श्रद्धालुओं द्वारा दी गई समस्त गुरुदक्षिणा आनंद कवाड़ द्वारा संचालित रोटी बैंक को समर्पित की जाएगी, जिससे मूक प्राणियों और जरूरतमंदों की सेवा हो सके।
पूर्व घोषणा के अनुसार जगद्गुरू महाराज द्वारा दिव्य मंत्रोच्चार से सिक्के सिद्ध कराए गए, जिन्हें श्रद्धालु अपने घर के धन स्थान पर रखने से समृद्धि प्राप्त होने का विश्वास जताते हैं।

रविवार 1 फरवरी को जगद्गुरू वसंत विजयानंद गिरी महाराज की पावन निश्रा में भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया जाएगा। हाथी, घोड़े, पालकी, रथ एवं आकर्षक झांकियों से सजी यह यात्रा प्रातः 11 बजे बालिया स्कूल के पास रामदेव मंदिर से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए अणुव्रत नगर ग्राउंड में संपन्न होगी। भैरव कथा और आगामी कलश यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह एवं आध्यात्मिक उल्लास देखने को मिल रहा है।




