पाली के वार्ड 37 में गंदगी का कहर: सीवरेज जाम, कचरे के ढेर और आवारा कुत्तों से दहशत, 15 दिन में समाधान का निगम का दावा

पाली शहर के बीच स्थित वार्ड नंबर 37 इन दिनों बदहाल सफाई व्यवस्था के चलते गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। वार्ड में फैली गंदगी, कचरे के ढेर, जाम सीवरेज, अव्यवस्थित नालियां और आवारा कुत्तों का आतंक अब स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी परेशानी बन चुका है। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि लोगों का घर से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है।
वार्ड की बिगड़ती हालत को लेकर पार्षद विकास बुबकिया के नेतृत्व में वार्डवासियों ने नगर निगम आयुक्त नवीन भारद्वाज को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की थी। ज्ञापन के बाद आयुक्त के निर्देश पर शुक्रवार को नगर निगम स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पार्षद के साथ वार्ड का जमीनी निरीक्षण किया।
निरीक्षण टीम में स्वास्थ्य अधिकारी कलीम अख्तर, मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक दिलीप कुमार, स्वास्थ्य निरीक्षक लक्ष्मण कुमार और स्वास्थ्य जमादार अशोक कुमार शामिल रहे। टीम ने वार्ड में फैली गंदगी, जाम सीवरेज लाइनों और नालियों की सफाई व्यवस्था का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की।

निरीक्षण के दौरान स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को बताया कि — कई इलाकों में नालियां लंबे समय से साफ नहीं हुई हैं, सीवरेज लाइनें जाम पड़ी हैं, जगह-जगह गंदा पानी जमा है, बदबू और मच्छरों से बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है इसके अलावा आवारा कुत्तों के झुंड आए दिन बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर हमला कर रहे हैं, जिससे दहशत का माहौल बना हुआ है।
निरीक्षण के दौरान निगम कर्मचारियों की उपस्थिति, सफाई रजिस्टर और मौके पर भौतिक सत्यापन भी किया गया। सफाई व्यवस्था में लापरवाही सामने आने पर अधिकारियों ने नाराजगी जताई। इस दौरान पार्षद विकास बुबकिया के साथ कई जागरूक नागरिक मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से आदित्य सालेचा, गौरव गौतम चौपड़ा, दीपक मेहता, धर्मेश गेमावत, सुनील सोनी और नवीन सोनी शामिल थे।
निरीक्षण के बाद नगर निगम प्रशासन ने वार्डवासियों को आश्वस्त किया कि — 7 से 15 दिनों के भीतर वार्ड को कचरा मुक्त किया जाएगा, नालियों की नियमित सफाई शुरू होगी, जाम सीवरेज व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी, आवारा कुत्तों का टीकाकरण कर उन्हें पकड़कर शेल्टर हाउस भेजा जाएगा, समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज वार्डवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समयसीमा में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यह मामला अब नगर निगम की कार्यप्रणाली और शहर की सफाई व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।



