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श्री निम्बेष्वर महादेव पशु मेले में घोड़ों की रिंग प्रतियोगिता बनी आकर्षण का केंद्र, देशभर से पहुंचे अश्व

पाली : राज्य सरकार की बजट घोषणा वर्ष 2024-25 के अंतर्गत बिंदु संख्या 133 के तहत श्री निम्बेष्वर महादेव परिसर में आयोजित हो रहे भव्य पशु मेले में रविवार को घोड़ों की रिंग प्रतियोगिता मुख्य आकर्षण रही। पाली जिले की सुमेरपुर तहसील में चल रहे इस मेले में राजस्थान के साथ-साथ महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों से करीब 250 अश्वों ने भाग लेकर प्रतियोगिता को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।

संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग डॉ. मनोज कुमार पंवार ने बताया कि मारवाड़ी नस्ल के घोड़ों की पारंपरिक चाल, सौंदर्य और नस्लीय विशेषताओं के आधार पर श्रेष्ठ अश्वों का चयन किया गया। प्रतियोगिता में उपखंड अधिकारी कालूराम कुम्हार, अश्व यूनियन अध्यक्ष हरिशंकर मेवाड़ा एवं भजन गायक छोटू सिंह रावणा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। प्रतियोगिता से पूर्व प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं और प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

प्रतियोगिताओं के विजेता
अदंत बछेरा वर्ग प्रथम – पिनाकेन भाई बारोठ (जागरवाल, पाटन, गुजरात), द्वितीय – महेन्द्र सिंह काकाणी, तृतीय – भूपेन्द्र देवड़ा (उदयपुर)
अदंत बछेरी वर्ग प्रथम – नरेन्द्र सिंह सलोदरिया, द्वितीय – कृष्णपाल सिंह (जोधपुर), तृतीय – प्रदीप कटारिया (गुरुग्राम)
दो दंत बछेरा वर्ग प्रथम – कृष्णपाल सिंह (जोधपुर), द्वितीय – चन्द्रपाल सिंह मुण्डारा, तृतीय – लालजी चौधरी (बड़गांवड़ा)
दो दंत बछेरी वर्ग प्रथम – सूरजभान सिंह राणावत, द्वितीय – मुस्ताक खान (चांदसा, गुजरात), तृतीय – पाबू सिंह (छोटा गुड़ा, बाली)
मादा अश्व वर्ग प्रथम – दिव्यांशु सोलंकी (शिवगंज), द्वितीय – राजवीर सिंह (छोटा गुड़ा, बाली), तृतीय – लालजी चौधरी

समाचार लिखे जाने तक नर अश्व प्रतियोगिता जारी थी, जिसमें 21 अश्व भाग ले रहे थे।

निर्णायक मंडल में निर्मल सिंह कंवला, शान्तनु सिंह (मावली-खेमपुर), राजेन्द्र सिंह कोरटा, रघुराज सिंह सहित पशुपालन विभाग के डॉ. नवीन परिहार, डॉ. रमेश चौधरी, डॉ. नरेन्द्र सिंह मेडतिया एवं डॉ. नरेन्द्र ठाकरे शामिल रहे।

आज होंगे गौवंश, भैंसवंश और ऊंट प्रतियोगिताएं

मेले के आगामी चरण में 16 फरवरी को उन्नत नस्ल के दुधारू गौवंश, सांड, भैंस, पाड़ा, बकरी-बकरा तथा ऊंट-ऊंटनी की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही रात्रिकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम भी मेले की शोभा बढ़ाएंगे। पूरे आयोजन में निम्बेष्वर महादेव ट्रस्ट अध्यक्ष जगत सिंह राणावत एवं ग्राम विकास अधिकारी जगदीश सुथार का विशेष सहयोग रहा।

यह पशु मेला न केवल परंपरा और संस्कृति का प्रतीक बन रहा है, बल्कि पशुपालकों के लिए नस्ल सुधार और प्रोत्साहन का महत्वपूर्ण मंच भी साबित हो रहा है।

Rajasthan Today

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