पाली में हीट वेव को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, अस्पतालों में विशेष वार्ड और रैपिड रिस्पॉन्स टीम गठित करने के निर्देश

पाली। जिले में संभावित हीट वेव (लू) के खतरे को देखते हुए चिकित्सा विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। लू से बचाव और प्रभावी प्रबंधन को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. विकास मारवाल ने सभी चिकित्सा संस्थानों को आवश्यक संसाधन और व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
सीएमएचओ डॉ. मारवाल ने बताया कि जिले के सभी खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के चिकित्सा संस्थानों में हीट वेव के दौरान आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीमों का गठन करें। साथ ही अस्पतालों में आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं ताकि लू से प्रभावित मरीजों को तुरंत उपचार मिल सके।
उन्होंने बताया कि अस्पतालों में इमरजेंसी कक्ष का प्रभावी प्रबंधन किया जाएगा तथा तापमान नियंत्रण के लिए एसी, कूलर, पंखे और पर्दों की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा उप जिला अस्पतालों में एक विशेष वार्ड, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 5 बेड और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 2 बेड लू-तापघात से पीड़ित मरीजों के लिए आरक्षित किए जाएंगे। सभी चिकित्सा संस्थानों में ऐसे मरीजों के उपचार के लिए आइसोलेशन कॉर्नर भी स्थापित किए जाएंगे।

डॉ. मारवाल ने बताया कि हीट स्ट्रोक से निपटने के लिए आवश्यक दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही हीट स्ट्रोक से संबंधित मामलों का नियमित पंजीकरण किया जाएगा और तापमान अधिक होने की स्थिति में मनरेगा कार्य योजना के अनुरूप बचाव और रोकथाम के उपाय भी लागू किए जाएंगे।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि अस्पतालों में आने वाले मरीजों की सुविधा के लिए ओपीडी रजिस्ट्रेशन और दवा वितरण काउंटर पर छाया की व्यवस्था, पीने के लिए स्वच्छ व ठंडा पानी, वेटिंग एरिया में शेड तथा साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
सीएमएचओ ने बताया कि हीट वेव से बचाव के लिए सतत मॉनिटरिंग और पर्यवेक्षण, स्वास्थ्य कर्मचारियों को थर्मामीटर, आइस पैक, ड्रिप सेट आदि के उपयोग का प्रशिक्षण तथा आमजन में जागरूकता के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही सभी चिकित्सा संस्थानों में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और तापमान नियंत्रण के प्रयास भी किए जाएंगे।



