google.com, pub-3021598506696014, DIRECT, f08c47fec0942fa0
Paliदेशब्रेकिंग न्यूज़राजस्थानराज्य

पाली में श्रीराम के आदर्शों पर मंथन, साहित्यकारों ने बताया—राम जीवन मूल्यों के सर्वोच्च प्रतीक

पाली : पाली में अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा पं. विष्णुप्रसाद चतुर्वेदी सभागार में भगवान श्रीराम के जीवन आदर्शों पर आधारित एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्वानों और साहित्यकारों ने श्रीराम के आदर्शों को वर्तमान समाज के लिए मार्गदर्शक बताया।

गोष्ठी के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार सत्यदेव संवितेन्द्र ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्श ही मनुष्य को सांस्कृतिक और नैतिक चेतना से जोड़ते हैं। आज समाज के नवनिर्माण के लिए इन आदर्शों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पवन पाण्डेय ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि राम केवल एक नाम नहीं, बल्कि मानवता को मिला अद्भुत वरदान हैं। उनके जीवन में शिक्षा, भक्ति, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

कार्यक्रम की शुरुआत कवि श्रीराम वैष्णव ‘कोमल’ द्वारा सरस्वती वंदना से हुई, जबकि संचालन मनीष कुमार अनैतिक ने किया। इस दौरान विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंग साझा किए।

रुचिर साहित्य परिषद सोजत के अध्यक्ष नवनीतराय रुचिर ने कहा कि जीवन में समर्पण और सच्चाई का मार्ग अपनाना ही राम के आदर्शों का अनुसरण है। वहीं कवयित्री तृप्ति पवन पांडेय ने कहा कि श्रीराम का जीवन स्त्रियों के सम्मान और उनके महत्व को समझने की प्रेरणा देता है। शिक्षक एवं लेखक मनीष कुमार भारद्वाज ने राम गीत प्रस्तुत करते हुए कहा कि पारिवारिक संबंधों के निर्वहन और परहित के लिए सर्वस्व त्यागने का सर्वोच्च उदाहरण श्रीराम हैं।

इस अवसर पर जिलाध्यक्ष भंवरसिंह राठौड़ चोटिला सहित साहित्य जगत से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने उपस्थित श्रोताओं को भारतीय संस्कृति और श्रीराम के आदर्शों से जुड़ने का संदेश दिया।

Rajasthan Today

Related Articles

Back to top button