google.com, pub-3021598506696014, DIRECT, f08c47fec0942fa0
Paliदेशब्रेकिंग न्यूज़राजस्थानराज्य

पाली : गूंजा ‘साहित्यिक संवाद’, भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण पर मंथन, युवाओं को जोड़ने पर जोर

पाली : राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के तत्वावधान में शनिवार को पाली के होटल मोनार्क में ‘पाली साहित्यिक संवाद’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा हुई, जिसमें जिलेभर के साहित्यकारों, कलाकारों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने की। अपने संबोधन में उन्होंने आधुनिकता और शिक्षा प्रणाली के संदर्भ में कई गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या आज का समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होता जा रहा है। उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा को शामिल करने का प्रावधान तो है, लेकिन इसका प्रभावी क्रियान्वयन अभी चुनौती बना हुआ है।

उन्होंने 21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन के तहत प्रत्येक जिले में ‘साहित्यिक एवं ज्ञान परंपरा केंद्र’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, ताकि साहित्य, लोककला और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करते हुए युवाओं को इससे जोड़ा जा सके।

कार्यक्रम में साहित्यकार पवन पांडेय ने साहित्य को समाज का दर्पण बताते हुए सांस्कृतिक संरक्षण में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। वीरेंद्र लखावत ने लोक परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता जताई, जबकि देवराज शर्मा ने भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया।

वरिष्ठ पत्रकार अरुण जोशी ने कहा कि मीडिया और साहित्य मिलकर समाज को सकारात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। युवा रचनाकार चित्रांशी रायजादा ने युवाओं से अपनी भाषा, संस्कृति और साहित्य से जुड़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाते हुए अपने विचार और प्रश्न साझा किए, जिससे संवाद और अधिक जीवंत बन गया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्स्थापन के लिए समाज के सभी वर्गों की भागीदारी आवश्यक है।

दूसरे सत्र में आयोजित काव्य गोष्ठी में कई कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ, जबकि समापन राष्ट्रगान एवं आभार प्रदर्शन के साथ किया गया। आयोजकों ने इसे पाली में साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

Rajasthan Today

Related Articles

Back to top button