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जवाई में लेपर्ड संरक्षण को लेकर प्रशासन सख्त, होटल-रिसॉर्ट संचालकों को दिए कड़े निर्देश

पाली : विश्व प्रसिद्ध जवाई ईको टूरिज्म क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन गतिविधियों के संतुलित विकास को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इसी उद्देश्य से शुक्रवार को बाली उपखंड क्षेत्र में संचालित होटल एवं रिसॉर्ट प्रबंधकों के लिए विशेष आमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें जवाई क्षेत्र में पर्यटन संचालन से जुड़े नियमों और संरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी दी गई।

होटल आरामगाह जवाई (रेडिसन) के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित कार्यशाला में जिला कलक्टर डॉ. रविन्द्र गोस्वामी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य फोकस जवाई क्षेत्र में लेपर्ड संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना रहा।

अतिरिक्त जिला कलक्टर बाली शैलेन्द्र सिंह ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से जवाई क्षेत्र में लागू वन्यजीव संरक्षण नियमों की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि लेपर्ड एवं अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने नो-गो एरिया की सख्ती से पालना, रात्रिकालीन सफारी पर पूर्ण प्रतिबंध तथा वन्यजीवों को प्रभावित करने वाले टॉर्च और तेज रोशनी के उपयोग पर रोक की जानकारी देते हुए सभी संचालकों से नियमों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने को कहा।

उन्होंने होटल एवं रिसॉर्ट संचालकों से कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत क्षेत्र में वृक्षारोपण, जल संरक्षण और अन्य जनहितकारी कार्यों में सहयोग देने का भी आह्वान किया। प्रशासन का मानना है कि पर्यटन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को समान प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है।

जिला परिवहन अधिकारी अनुप चौधरी ने मोटर वाहन अधिनियम और सड़क सुरक्षा नियमों की जानकारी देते हुए पर्यटकों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं प्रशिक्षु आईएएस एवं सहायक वन संरक्षक अधिकारियों ने राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर द्वारा पारित आदेशों तथा वन विभाग की निर्धारित एसओपी की विस्तृत जानकारी दी।

उप पुलिस अधीक्षक बाली पारसराम ने होटल और रिसॉर्ट प्रबंधकों को पर्यटकों के साथ सकारात्मक व्यवहार, बेहतर संवाद और पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पर्यटकों का अनुभव जितना बेहतर होगा, जवाई की पहचान उतनी ही मजबूत होगी।

कार्यशाला में करीब 60 होटल एवं रिसॉर्ट संचालकों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने जवाई क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार सृजन और सतत पर्यटन विकास से जुड़े सुझाव साझा किए।

अधिकारियों ने कहा कि जवाई केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और मानव-प्रकृति सहअस्तित्व का एक अनूठा मॉडल है। ऐसे में क्षेत्र के विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है।

कार्यशाला में उपखंड अधिकारी बाली दिनेश विश्नोई, तहसीलदार जितेन्द्र सिंह राठौड़, विकास अधिकारी भोपाल सिंह जोधा, वन विभाग एवं स्थानीय निकायों के अधिकारियों सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

जवाई क्षेत्र में बढ़ते पर्यटन दबाव के बीच आयोजित यह कार्यशाला प्रशासन, पर्यटन उद्योग और पर्यावरण संरक्षण के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

Rajasthan Today

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