पाली जिला कारागार में विधिक जागरूकता शिविर, बंदियों को नशे से दूर रहने का दिया संदेश

पाली : माननीय सदस्य सचिव, राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पाली के अध्यक्ष एवं सचिव (अपर जिला न्यायाधीश) विक्रम सिंह भाटी के निर्देशन में जिला कारागार, पाली में विधिक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य बंदियों को स्वास्थ्य, विधिक अधिकारों एवं नशा मुक्ति के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यशाला में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. रोयमोन जोसेफ ने बंदियों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देते हुए नशे के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “जिंदगी को हां कहें और नशे को हमेशा के लिए ना कहें।” उन्होंने बताया कि नशे की लत व्यक्ति को अपराध की ओर धकेलती है, जिसका खामियाजा परिवार और समाज दोनों को भुगतना पड़ता है।
कार्यवाहक उपाधीक्षक जोराराम डांगा ने बंदियों से संवाद करते हुए नशे की लत के दुष्प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नशा छोड़ने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कुछ दवाइयों का अत्यधिक सेवन मानसिक और शारीरिक रूप से व्यक्ति को कमजोर बना सकता है, इसलिए नशे से हमेशा दूर रहना चाहिए।

जिला मुख्यालय से हेड पीएलवी मांगीलाल तंवर ने बंदियों को नशा मुक्ति अभियान, नालसा वीर परिवार सहायता योजना, नालसा हेल्पलाइन नंबर 15100, कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न अधिनियम-2013, बाल विवाह निषेध कानून एवं बंदियों के अधिकारों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित हेल्पलाइन 14456 पर संपर्क कर नजदीकी डी-एडिक्शन सेंटर और काउंसलिंग सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है।
कार्यशाला के दौरान मेल नर्स रविंद्र परिहार ने भी बंदियों को संतुलित आहार, योग, व्यायाम एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सामान्य बीमारियों में अनावश्यक दवाइयों के सेवन से बचना चाहिए।
कार्यशाला में जेल स्टाफ सोहनलाल, पूनम सहित बड़ी संख्या में बंदी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने नशामुक्त एवं स्वस्थ समाज के निर्माण का संकल्प लिया।



