घुमंतू परिवार की हाई रिस्क गर्भवती बनी स्वास्थ्य विभाग की चुनौती, सतत निगरानी और टीमवर्क से बची मां-बच्चे की जान

पाली : मातृत्व की राह तब और चुनौतीपूर्ण हो जाती है जब गर्भवती महिला नियमित स्वास्थ्य सेवाओं से दूर घुमंतू जीवन जी रही हो। पाली जिले के रानी ब्लॉक स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खिंवाड़ा की चिकित्सा टीम ने ऐसे ही एक बेहद संवेदनशील मामले में अपनी सतर्कता, मानवीय संवेदनशीलता और लगातार फॉलोअप के दम पर एक हाई रिस्क गर्भवती महिला और उसके नवजात की सुरक्षित जान बचाकर मिसाल पेश की है।
घुमंतू परिवार से संबंध रखने वाली महिला गंभीर एनीमिया से पीड़ित थी और वह ग्रैंड मल्टीपेरा श्रेणी में भी शामिल थी, जिसके कारण उसकी गर्भावस्था अत्यंत जोखिमपूर्ण मानी जा रही थी। नियमित स्वास्थ्य सेवाओं से दूर होने के कारण मां और गर्भस्थ शिशु दोनों पर खतरा लगातार बना हुआ था।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कई बार महिला के अस्थायी निवास स्थान पर पहुंचकर उसे और उसके परिजनों को संभावित खतरों की जानकारी दी तथा सुरक्षित प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी। हालांकि महिला जिला चिकित्सालय जाने के लिए तैयार नहीं हुई। इसके बावजूद चिकित्सा विभाग ने प्रयास नहीं छोड़े और ब्लॉक कंट्रोल रूम के माध्यम से लगातार उसकी निगरानी जारी रखी।
रविवार देर रात महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। सूचना मिलते ही उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खिंवाड़ा लाया गया, जहां चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने बिना समय गंवाए उपचार शुरू किया। टीम के समन्वित प्रयासों से सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया गया। वर्तमान में जच्चा और नवजात दोनों स्वस्थ हैं तथा चिकित्सकीय निगरानी में हैं।
रानी बीसीएमओ डॉ. ओजस रावल ने बताया कि ब्लॉक कंट्रोल रूम के माध्यम से सभी हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता और समय पर रेफरल उपलब्ध कराया जाता है, ताकि किसी भी प्रकार की जटिलता से बचा जा सके।
सीएमएचओ डॉ. विकास मारवाल ने बताया कि इस सफल प्रयास में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खिंवाड़ा के चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ. भूपेंद्र सिंह, एएनएम अल्फिया, नर्सिंग अधिकारी भेराराम, आशा सहयोगिनी सहित पूरी स्वास्थ्य टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान, सतत फॉलोअप और टीमवर्क के कारण एक और हाई रिस्क गर्भवती महिला का सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित हो सका।



