गुरु पूर्णिमा पर गूंजा गुरु महिमा का संदेश, ‘गुरु की एक उंगली भी थाम ली तो जीवन हो जाएगा धन्य’

पाली : शहर के रूई कटला स्थित रघुनाथ स्मृति भवन में गुरुदेव सुकन मुनि के सानिध्य में चल रहे चातुर्मास के दौरान गुरु पूर्णिमा पर आयोजित विशेष धर्मसभा में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति में डॉ. वरुण मुनि ने गुरु के महत्व पर प्रेरक प्रवचन देते हुए कहा कि “यदि गुरु की तीन उंगलियों में से एक उंगली भी पकड़ ली जाए तो मनुष्य का जीवन धन्य हो सकता है।”
उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा दिखाने वाले मार्गदर्शक होते हैं। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर जिनवाणी का श्रवण करना जीवन को सार्थक बनाने का श्रेष्ठ अवसर है।
प्रवचन के दौरान डॉ. वरुण मुनि ने एक प्रेरक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि एक किसान के खेत में बेमौसम खिला एक दुर्लभ फूल बाजार में पहले सौ रुपए, फिर हजार रुपए और अंत में राजा द्वारा एक लाख रुपए में खरीदने की पेशकश तक पहुंच गया। राजा ने बताया कि वह यह पुष्प अपने गुरु को गुरु पूर्णिमा पर अर्पित करना चाहता है। यह सुनकर किसान ने धन का मोह छोड़ स्वयं उस पुष्प को अपने गुरु को समर्पित करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि धन तो आता-जाता रहता है, लेकिन गुरु के चरणों में समर्पण से जीवन और आने वाली पीढ़ियां धन्य हो जाती हैं।
उन्होंने कहा कि जीवन और मृत्यु के बीच सबसे बड़ा महत्व हमारी ‘चॉइस’ का होता है। व्यक्ति चाहे तो गुरु की महिमा का गुणगान करे या फिर निंदा और बुराइयों में जीवन व्यर्थ कर दे। उन्होंने नशे और गलत आदतों से दूर रहने का संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन रूपी पुष्प को गुरु और धर्म के चरणों में अर्पित करना चाहिए।

डॉ. वरुण मुनि ने पारिवारिक जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि लोग जीवनभर संपत्ति कमाते हैं और अंत में वसीयत के माध्यम से सब कुछ परिवार को सौंप देते हैं, लेकिन धर्म की वसीयत लिखना भूल जाते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि हर व्यक्ति अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए धर्म, संस्कार और गुरु सेवा की वसीयत अवश्य छोड़े, ताकि परिवार सदैव सद्मार्ग पर चलता रहे।
उन्होंने कहा कि “धर्म के मार्ग में जो हार जाता है, वही वास्तव में अमर हो जाता है।” गुरु का गुणगान जीवन को ऊंचाइयों तक पहुंचाता है और गुरु ही जीव को भवसागर से पार लगाने वाले सच्चे मार्गदर्शक हैं।
इस अवसर पर स्वर सम्राट महेश मुनि ने गुरु महिमा पर भावपूर्ण गीतिका प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उन्होंने एकलव्य के त्याग और गुरु भक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्चा शिष्य अपने गुरु के सम्मान के लिए हर त्याग करने को तैयार रहता है।
धर्मसभा में गुरुदेव सुकन मुनि, अमृत मुनि, साध्वी उमराव कंवर, साध्वी प्रीति सुधा एवं साध्वी संयम सुधा सहित अनेक संत-साध्वियों का सानिध्य प्राप्त हुआ। प्रवचन के दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने गुरु वंदना करते हुए आध्यात्मिक संदेशों का लाभ लिया और गुरु के बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
गुरु पूर्णिमा पर आयोजित यह प्रवचन श्रद्धालुओं के लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों, गुरु भक्ति और आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने वाला प्रेरणादायी संदेश बन गया।



