ओबीसी सर्वे के आंकड़ों पर रावणा राजपूत समाज में नाराजगी, पाली में कलेक्ट्रेट के बाहर धरना-प्रदर्शन

पाली : राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग की ओर से प्रदेशभर में करवाए गए ओबीसी सर्वे में रावणा राजपूत समाज की जनसंख्या के आंकड़ों को लेकर समाज में नाराजगी सामने आई है। सर्वे के आंकड़ों को वास्तविक संख्या से काफी कम बताते हुए पाली रावणा राजपूत समाज के लोगों ने बुधवार को जिला कलक्टर कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर सर्वे की प्रक्रिया और आंकड़ों की निष्पक्ष समीक्षा कराने की मांग उठाई।
रावणा राजपूत समाज के जिलाध्यक्ष प्रमेन्द्र सिंह परिहार ने कहा कि आयोग की ओर से करवाए गए सर्वेक्षण की प्रक्रिया में गंभीर कमियां दिखाई देती हैं। उन्होंने दावा किया कि सर्वे में रावणा राजपूत समाज की जो संख्या सामने आई है, वह समाज की वास्तविक जनसंख्या के पांचवें हिस्से तक भी नहीं पहुंचती।
उन्होंने कहा कि आंकड़ों में इतनी बड़ी विसंगति सामने आने से सर्वेक्षण की पूर्णता, सर्वे करने की पद्धति और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं। समाज की ओर से मांग की गई कि सर्वे की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र तरीके से जांच कर वास्तविक आंकड़ों को सामने लाया जाए।
जिलाध्यक्ष परिहार ने कहा कि ओबीसी वर्ग के हितों, सामाजिक न्याय, समान राजनीतिक प्रतिनिधित्व और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए आयोग द्वारा तैयार रिपोर्ट एवं उसके आंकड़ों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। साथ ही सर्वे में सामने आई कमियों का स्वतंत्र सत्यापन करवाकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।
उन्होंने कहा कि समाज किसी भी प्रकार की गलत या अपूर्ण जानकारी के आधार पर राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अन्य अधिकारों से प्रभावित नहीं होना चाहता। इसलिए सरकार और आयोग को मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायसंगत कदम उठाने चाहिए।
समाज के जिलाध्यक्ष प्रमेन्द्र सिंह परिहार ने चेतावनी दी कि यदि आयोग और राज्य सरकार की ओर से सर्वे के वास्तविक आंकड़े सामने नहीं लाए गए और रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया तो समाज आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज करने का निर्णय ले सकता है।
उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा घेराव जैसे आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में समाज आगामी नगरीय निकाय एवं पंचायती राज चुनावों के बहिष्कार का निर्णय भी ले सकता है।
रावणा राजपूत समाज के शहर अध्यक्ष विक्रम सिंह भैंसाणा ने कहा कि ओबीसी वर्ग की वास्तविक जनसंख्या और सामाजिक-राजनीतिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए आरक्षण एवं राजनीतिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था को न्यायसंगत एवं संख्यानुपातिक बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का आधार सही और विश्वसनीय आंकड़े होने चाहिए। इसलिए सर्वे के आंकड़ों का पुनः परीक्षण कर वास्तविक स्थिति के आधार पर आवश्यक निर्णय लिया जाना चाहिए।
धरना-प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में रावणा राजपूत समाज के लोग जिला कलक्टर कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए। समाजबंधुओं ने सर्वे के आंकड़ों में सुधार, रिपोर्ट सार्वजनिक करने और निष्पक्ष सत्यापन की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद की।
इस अवसर पर पूर्व शहर अध्यक्ष रतन सिंह झाला, नरपत सिंह सोलंकी, खीम सिंह भाटी, लाल सिंह पंवार, जब्बर सिंह देवल, हितपाल सिंह चोटिला, विक्रम सिंह, मीठू सिंह, राजू सिंह भाटी, मदन सिंह बाघेला, हेमंत सिंह चौहान, ढलसिंह चौहान, भीक सिंह, राजेन्द्र सिंह, केशर सिंह, गणपत सिंह, जगदीश सिंह, गोपाल सिंह चावड़ा, हडवंत सिंह, गोविन्द सिंह मेघावत, शैतान सिंह राठौड़ सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु मौजूद रहे।
समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग का विरोध करना नहीं, बल्कि ओबीसी सर्वे में वास्तविक एवं पारदर्शी आंकड़े सुनिश्चित कर सामाजिक न्याय और उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व की व्यवस्था को मजबूत करना है।



