गुरुद्वय की जन्मजयंती पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, 5500 श्रद्धालुओं ने लिया गौतम प्रसादी का लाभ

पाली : श्री वर्द्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, रुई कटला की ओर से अणुव्रत नगर स्थित श्री मरुधर केसरी रूप रजत दरबार में आयोजित अष्ट दिवसीय जन्मजयंती समारोह का समापन श्रद्धा, भक्ति और सेवा भावना के साथ हुआ। श्रमण सूर्य मरुधर केसरी 1008 श्री मिश्रीमलजी महाराज साहब की 136वीं जन्मजयंती तथा लोकमान्य राष्ट्रसंत श्री रूपचंदजी महाराज साहब की 97वीं जन्मजयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में देशभर से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं पाली पहुंचे।
समारोह में संतों के सानिध्य में गुरु गुणगान, धार्मिक अनुष्ठान और विभिन्न सेवा कार्यक्रम हुए। अंतिम दिवस पूरा परिसर गुरुदेवों के जयकारों से गूंजता रहा।

पंचरंगी ध्वज के आरोहण से हुआ शुभारंभ
समारोह की शुरुआत जैन धर्म के पंचरंगी ध्वज के आरोहण से हुई। मन्नालाल-सुरेंद्र लोढ़ा परिवार ने ध्वजारोहण की सेवा निभाई। इसके बाद सामूहिक नवकार महामंत्र का मंगलाचरण हुआ। हजारों श्रद्धालुओं द्वारा एक साथ नवकार महामंत्र का जाप किए जाने से वातावरण भक्तिमय हो गया।
जवरीलाल, उत्तमचंद एवं पदमचंद रातड़िया मुथा परिवार ने श्री मरुधर केसरी रूप रजत दरबार के उद्घाटन की सेवा का लाभ लिया। दरबार के उद्घाटन के बाद श्रद्धालुओं ने दोनों गुरुदेवों के जयकारे लगाकर श्रद्धा व्यक्त की।

गुरुदेवों के आदर्शों को जीवन में उतारने का आह्वान
प्रवर्तक सुकनमुनि महाराज ने कहा कि मरुधर केसरी महाराज जन-जन की आस्था के केंद्र थे। उनकी वाणी में निर्भीकता और समाज एवं राष्ट्र के प्रति गहरी प्रतिबद्धता थी। धर्म और समाज के सामने आने वाली चुनौतियों के समय उन्होंने सदैव आगे बढ़कर अपनी भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि रूपमुनि महाराज का जीवन भी गुरु भक्ति के साथ समाज सेवा, गौसेवा और राष्ट्रसेवा को समर्पित रहा। दोनों महापुरुष भले ही भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और संस्कार समाज को आज भी दिशा दे रहे हैं।
उपप्रवर्तक अमृतमुनि महाराज ने कहा कि दोनों संतों ने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागृति पैदा करने के साथ गौ संरक्षण, पर्यावरण, नारी शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए। उनके बताए मार्ग पर आगे बढ़ते हुए समाज ने चिकित्सालय, विद्यालय, छात्रावास, शोध संस्थान और नारी शिक्षा केंद्र जैसी सेवा गतिविधियों को गति दी।

देशभर से पहुंचे गुरुभक्त
जन्मजयंती समारोह में चेन्नई, बेंगलुरु, दिल्ली, हैदराबाद, मुंबई, जयपुर, जोधपुर सहित ब्यावर, सादड़ी, पीपाड़, बिलाड़ा, जैतारण और सोजत समेत विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु पहुंचे। बड़ी संख्या में गुरुभक्तों की मौजूदगी से पाली का माहौल गुरु भक्ति से सराबोर नजर आया।
5500 श्रद्धालुओं ने ली गौतम प्रसादी
समारोह का प्रमुख आकर्षण गौतम प्रसादी रही। इसमें करीब 5500 श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। पाली समाज के युवा एवं महिला मंडलों ने भोजन व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाई। युवाओं ने श्रद्धालुओं को बैठाकर भोजन करवाया और स्वयं प्रसादी परोसकर मनुहार की।
बाहर से आए श्रद्धालुओं के लिए जिस आत्मीयता के साथ भोजन की व्यवस्था की गई, उसकी सभी ने सराहना की। आयोजन में पाली की ‘अतिथि देवो भवः’ की परंपरा भी देखने को मिली।
जीवदया के लिए दान राशि लिखाई
गुरुदेवों की स्मृति को जीवदया से जोड़ते हुए समाजबंधुओं ने जीवदया कार्यों के लिए लाखों रुपए की दान राशि लिखाई। इस पहल के माध्यम से गुरुदेवों के करुणा, सेवा और जीवदया के संदेश को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया गया।
41 उपवास करने वाले राजकुमार बांठिया का सम्मान
समारोह में 41 उपवास की कठिन तपस्या पूर्ण करने वाले राजकुमार बांठिया का विशेष बहुमान किया गया। संघ की ओर से उन्हें प्रशस्ति पत्र एवं साफा प्रदान कर तपस्या की अनुमोदना की गई।

‘अमृतवाणी’ पुस्तक का विमोचन
कार्यक्रम में उपप्रवर्तक अमृतमुनि महाराज द्वारा लिखित पुस्तक ‘अमृतवाणी’ का विमोचन भी किया गया। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक स्वाध्याय करने वाले श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी रहेगी।
अतिथियों एवं संघों का बहुमान
समारोह में विभिन्न स्थानों से आए अतिथियों एवं संघों का साफा, माला और शाल से सम्मान किया गया। मुख्य अतिथि रतनलाल मुथा, मैसूर, समारोह अध्यक्ष चंद्रप्रकाश तालेड़ा, चेन्नई, विशिष्ट अतिथि के.सी. बोकाड़िया, मुंबई, महावीर चौधरी, भीलवाड़ा, नरेश बोहरा, मुंबई तथा सुरेश लुणावत, चेन्नई सहित अन्य अतिथियों का बहुमान किया गया।
आगामी आयोजनों की घोषणा
समारोह के दौरान आगामी धार्मिक कार्यक्रमों की भी घोषणा की गई। श्रमण संघ अमृत महोत्सव का आयोजन सादड़ी में 10 मार्च 2027 को होगा। इसके अलावा पौष कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को कुरड़ाया गांव में गुरु बुध स्मारक का उद्घाटन तथा पौष शुक्ल चतुर्दशी को जैतारण पावन धाम में मरुधर केसरी श्री मिश्रीमलजी महाराज की 43वीं पुण्यतिथि मनाने की घोषणा की गई।

समाज की सामूहिक भागीदारी से सफल हुआ आयोजन
समारोह की व्यवस्थाओं में संघ अध्यक्ष पदम ललवानी, मंत्री प्रकाश कटारिया सहित अनेक समाजबंधुओं ने सक्रिय सहयोग दिया। स्थानकवासी जैन युवक मंडल, मरुधर केसरी युवा समिति और महिला मंडल के सदस्यों ने भी विभिन्न व्यवस्थाएं संभालीं।
समापन अवसर पर सुकनमुनि महाराज ने श्रद्धालुओं से धर्म, संयम, सेवा, जीवदया और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. वरुणमुनि महाराज ने किया। अष्ट दिवसीय आयोजन का अंतिम दिन गुरु स्मृति के साथ सेवा, तप, त्याग और समाज कल्याण के संकल्प का संदेश देकर संपन्न हुआ।



