पाली में शिक्षक संघ के शैक्षिक सम्मेलन में शिक्षा की गुणवत्ता पर मंथन, ‘मिशन मानस’ को सफल बनाने का लिया संकल्प

पाली : राजस्थान शिक्षक संघ (एकीकृत) की ओर से शुक्रवार को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, आवासन मंडल पाली में जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे शिक्षक प्रतिनिधियों एवं संगठन के पदाधिकारियों ने शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और शिक्षक हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
सम्मेलन में शैक्षिक नवाचार, विद्यार्थियों में राष्ट्रीयता की भावना विकसित करने, विद्यालयों में अनुशासन, प्रार्थना सभा के माध्यम से नेतृत्व क्षमता विकसित करने, शिक्षक हितों, सेवा संबंधी समस्याओं तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जैसे विषय प्रमुखता से उठाए गए। शिक्षक प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में सामने आ रही समस्याओं और मांगों को भी मंच के समक्ष रखा।
जिला स्तरीय सम्मेलन का शुभारंभ सरस्वती वंदना के साथ हुआ। शिक्षाविद् देवराज शर्मा, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष जय नारायण कडेचा, जिला अध्यक्ष नन्द किशोर शर्मा एवं अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र प्रसाद लखेरा ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इसके बाद अतिथियों एवं संगठन के पदाधिकारियों का माला एवं साफा पहनाकर स्वागत किया गया।
जिला अध्यक्ष नन्द किशोर शर्मा ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य शिक्षकों को एक मंच पर लाकर शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सामूहिक रूप से विचार-विमर्श करना तथा विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रभावी प्रयासों को आगे बढ़ाना रहा।

सम्मेलन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए शिक्षक प्रतिनिधियों ने शिक्षकों के सामने आ रही सेवा संबंधी समस्याओं और अन्य मांगों को प्रमुखता से रखा। प्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षकों को बेहतर कार्य वातावरण मिलने के साथ उनकी समस्याओं का समयबद्ध समाधान होना भी आवश्यक है, ताकि वे विद्यार्थियों की शिक्षा पर अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान दे सकें।
प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष जय नारायण कडेचा ने संगठन की एकजुटता पर जोर देते हुए शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों के लिए संगठित होकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की सामूहिक भागीदारी और संगठनात्मक एकजुटता के माध्यम से शिक्षा एवं शिक्षक हितों से जुड़े विषयों को प्रभावी तरीके से उठाया जा सकता है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य गंगाधर पाठक ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने शिक्षकों को विद्यालयों में उपलब्ध आईसीटी लैब एवं शिक्षण सहायक सामग्री का प्रभावी उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और शिक्षण सामग्री का कक्षा-कक्ष में बेहतर उपयोग विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक रुचिकर और प्रभावी बनाने में सहायक हो सकता है।
अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी राजेंद्र प्रसाद लखेरा ने शिक्षा विभाग की ओर से विद्यार्थियों के हित में संचालित विभिन्न लोक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे पात्र विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें इन योजनाओं का अधिकतम लाभ दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा कि विद्यालय स्तर पर शिक्षक विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सम्मेलन में जिला कलेक्टर की पहल पर विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर में सुधार के लिए संचालित ‘मिशन मानस’ कार्यक्रम पर भी चर्चा हुई। राजस्थान शिक्षक संघ (एकीकृत) ने कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन में हरसंभव सहयोग देने के लिए शिक्षकों को प्रेरित किया।
वक्ताओं ने कहा कि कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों के सामान्य ज्ञान में वृद्धि देखने को मिली है। साथ ही सरकारी विद्यालयों के छोटे बच्चे भी अंग्रेजी में संवाद करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। शिक्षकों से कार्यक्रम को विद्यालय स्तर पर प्रभावी बनाने और अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इससे जोड़ने का आह्वान किया गया।
अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी प्रवीण जांगिड़ ने विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक वातावरण तैयार करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में निरंतर सुधार के लिए विद्यालय स्तर पर नियमित एवं योजनाबद्ध प्रयास आवश्यक हैं।
उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों की शैक्षिक आवश्यकताओं को समझते हुए शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने और सीखने में कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
सहायक निदेशक ललित देव शर्मा ने विद्यार्थियों में पुस्तक पढ़ने की आदत विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने शिक्षकों से विद्यालयों में उपलब्ध पुस्तकालय की पुस्तकों का विद्यार्थियों से अधिकतम उपयोग करवाने तथा उनमें नियमित पठन की आदत विकसित करने का आह्वान किया।
उन्होंने विद्यार्थियों को सुंदर लेखन के लिए भी प्रेरित करने की बात कही। वक्ताओं ने कहा कि पुस्तकों के अध्ययन से विद्यार्थियों के ज्ञान के साथ उनकी भाषा, अभिव्यक्ति और रचनात्मक क्षमता का भी विकास होता है।

अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी चंद्रेश पाल सिंह ने विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा देने और विद्यालयों में अनुशासन की भावना विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने शिक्षकों से विद्यालय में ऐसा वातावरण तैयार करने का आह्वान किया, जहां विद्यार्थी अनुशासन के साथ सीखने और अपनी क्षमताओं को विकसित करने के लिए प्रेरित हों।
साहित्यकार एवं शिक्षाविद् देवराज शर्मा ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में शैक्षिक, सहशैक्षणिक एवं नवाचारयुक्त पाठ्येतर गतिविधियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों के संचालन से विद्यार्थियों में नई ऊर्जा का संचार होता है और उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।
उन्होंने बाल साहित्य को भी विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उनके अनुसार बाल साहित्य विद्यार्थियों में आत्मविश्वास एवं आत्मविकास की भावना का संचार करने में सहायक होता है।
सम्मेलन में विद्यालय की प्रार्थना सभा को केवल नियमित गतिविधि तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों में नेतृत्वकर्ता की भावना विकसित करने के माध्यम के रूप में उपयोग करने पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को विभिन्न जिम्मेदारियां देकर उनमें मंच संचालन, वक्तृत्व, अनुशासन और नेतृत्व जैसे गुण विकसित किए जा सकते हैं।
सम्मेलन में देवेंद्र मेवाड़ा, ओमप्रकाश पांडे, गजेंद्र पुरोहित, रमेश गोयल, राजेश व्यास, विक्रम सिंह पंवार, जगदीश दिवाकर, दाऊ सिंह चौहान एवं नंदकिशोर शर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने भी शिक्षा व्यवस्था एवं शिक्षक हितों से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का मंच संचालन दिलीप पटेल ने किया। सम्मेलन में उपस्थित शिक्षक प्रतिनिधियों ने विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने, नवाचारों को अपनाने, सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र विद्यार्थियों तक पहुंचाने और ‘मिशन मानस’ जैसे कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाने पर जोर दिया।



