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रेबीज से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी, बांगड़ अस्पताल में दिया समय पर उपचार का संदेश

पाली : विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर पाली के बांगड़ अस्पताल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में चिकित्सा एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने आमजन को रेबीज बीमारी के खतरे, इससे बचाव के उपाय और कुत्ते अथवा अन्य संक्रमित पशु के काटने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेने के संबंध में जानकारी दी। चिकित्सा दल ने स्पष्ट किया कि रेबीज गंभीर बीमारी है, लेकिन समय पर उपचार और टीकाकरण के माध्यम से इससे होने वाली मृत्यु को रोका जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान चिकित्सा एवं स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि कुत्ते या किसी अन्य संदिग्ध संक्रमित पशु के काटने की स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल प्राथमिक सावधानी बरतना जरूरी है। काटे गए स्थान को साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोने के बाद बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचना चाहिए।

चिकित्सकों ने बताया कि पशु के काटने के बाद चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी प्रकार की लापरवाही या उपचार में देरी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है।

जागरूकता कार्यक्रम में आमजन को सलाह दी गई कि पशु के काटने पर किसी भी प्रकार के घरेलू उपचार के भरोसे नहीं रहना चाहिए। घाव को तत्काल साफ करने के बाद चिकित्सकीय जांच और आवश्यक उपचार करवाना चाहिए। विशेष रूप से आवारा कुत्तों एवं अन्य पशुओं से सावधानी बरतने की अपील की गई।

चिकित्सा दल ने यह भी संदेश दिया कि रेबीज की रोकथाम के लिए पालतू एवं अन्य पशुओं का समय पर टीकाकरण करवाना जरूरी है। पशुओं के संपर्क में आने वाले लोगों को भी आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी गई।

कार्यक्रम में डॉ. लक्ष्मी कंवर (एमओ), डॉ. ललिता नाथ (एपी), सलीम मोहम्मद (एनएस), हाजी मोहम्मद (एनओ), डॉ. गंगापाल (आर.) तथा डॉ. पूजा चारण (एमओ) सहित एमबीबीएस इंटर्न और जीएनएम स्टूडेंट्स ने सहभागिता की।

इस दौरान चिकित्सा दल ने रेबीज से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी साझा करते हुए लोगों को जागरूक किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों तक यह संदेश पहुंचाना रहा कि रेबीज जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए जागरूकता और समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप सबसे महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम में बताया गया कि रेबीज से बचाव के लिए पशु के काटने के बाद समय गंवाए बिना चिकित्सा सहायता लेना आवश्यक है। घाव की सही तरीके से सफाई, चिकित्सकीय परामर्श और निर्धारित एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन को लेकर लोगों को जागरूक किया गया।

चिकित्सा दल ने आमजन से अपील की कि पशु के काटने की किसी भी घटना को हल्के में न लें और तत्काल अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार करवाएं। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सावधानी, जागरूकता, समय पर उपचार और टीकाकरण के जरिए रेबीज से होने वाली मृत्यु को रोका जा सकता है।

Rajasthan Today

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