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पाली में किशोर गृह, शिशु गृह और जिला जेल का औचक निरीक्षण, 114 बंदियों की सुविधाओं का लिया जायजा

पाली : राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पाली के सचिव एवं अपर जिला न्यायाधीश विक्रम सिंह भाटी ने मंगलवार को राजकीय संप्रेषण एवं किशोर गृह, राजकीय शिशु गृह तथा जिला कारागृह, पाली का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बाल गृहों में रह रहे बालकों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, उनकी सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की जानकारी ली। वहीं जिला कारागृह में निरुद्ध बंदियों से संवाद कर भोजन, पेयजल, चिकित्सा और साफ-सफाई की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

निरीक्षण का उद्देश्य बालकों और बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की स्थिति जानना तथा उनके अधिकारों और विधिक सहायता से संबंधित जानकारी देना रहा।

निरीक्षण के दौरान सचिव विक्रम सिंह भाटी ने राजकीय संप्रेषण एवं किशोर गृह में आवासित विधि से संघर्षरत बालकों से बातचीत की। उन्होंने बालकों से उनके रहने, भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।

उन्होंने यह भी पूछा कि बालकों को अपने परिजनों से मुलाकात करने की सुविधा मिल रही है या नहीं। साथ ही न्यायमित्र की ओर से उनके प्रकरणों की स्थिति के बारे में समय-समय पर जानकारी दिए जाने को लेकर भी संवाद किया।

सचिव भाटी ने बालकों को शिक्षा के साथ कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियों में नियमित रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सकारात्मक सोच अपनाने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया।

निरीक्षण के दौरान बालकों को निःशुल्क विधिक सहायता, उनके कानूनी अधिकारों और बाल संरक्षण से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी गई। सचिव भाटी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाल गृहों में रहने वाले बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने बालकों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, आवश्यक परामर्श सेवाओं और मैत्रीपूर्ण माहौल सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इसके अलावा भवन की नियमित साफ-सफाई बनाए रखने तथा पालना गृह में स्वच्छता व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने कहा कि बालकों की देखभाल के दौरान उनकी जरूरतों, सुरक्षा और भविष्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि उन्हें शिक्षा और व्यक्तित्व विकास के लिए उचित अवसर मिल सकें।

इसके बाद सचिव भाटी ने जिला कारागृह, पाली का निरीक्षण किया। इस दौरान कारागृह में कुल 114 बंदी निरुद्ध पाए गए। उन्होंने बंदियों से सीधे संवाद कर भोजन, पेयजल, चिकित्सा सुविधाओं और साफ-सफाई की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली।

उन्होंने बंदियों से उनकी समस्याओं के बारे में भी पूछा और उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति जानी। निरीक्षण के दौरान बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

सचिव भाटी ने ऐसे बंदियों को निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में बताया, जो आर्थिक स्थिति के कारण निजी अधिवक्ता नियुक्त करने में असमर्थ हैं या विधिक सहायता नहीं मिलने के कारण बिना अधिवक्ता के कारागृह में निरुद्ध हैं।

उन्होंने जमानत स्वीकृत होने के बावजूद कारागृह में निरुद्ध बंदियों के मामलों की स्थिति की जानकारी ली। साथ ही संबंधित बंदियों को उनके प्रकरणों की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया।

निरीक्षण के दौरान नवागंतुक बंदियों से भी बातचीत की गई। उनसे घटना अथवा कथित अपराध के समय उनकी आयु के संबंध में जानकारी प्राप्त की गई, ताकि आवश्यक कानूनी पहलुओं पर ध्यान दिया जा सके।

कारागृह में स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी के दौरान बताया गया कि बंदियों की ओपीडी के समय स्वास्थ्य जांच की जाती है। किसी बंदी की तबीयत बिगड़ने या आपात स्थिति उत्पन्न होने पर उसे राजकीय बांगड़ अस्पताल, पाली रेफर किया जाता है।

निरीक्षण के दौरान संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी लेकर बंदियों को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और साफ-सफाई बनाए रखने की व्यवस्था पर ध्यान दिया गया।

इस दौरान किशोर न्याय बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट गजेन्द्र कुमार, न्यायमित्र खुमाराम परिहार, समन्वयक कन्हैयालाल सहित संबंधित अधिकारी और कारागृह कार्मिक उपस्थित रहे।

निरीक्षण के माध्यम से बाल गृहों में आवासित बच्चों की देखभाल, शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों के साथ-साथ बंदियों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की समीक्षा की गई।

Rajasthan Today

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