पाली के सहायक आचार्य गिरीश मल ने हासिल की पीएचडी की उपाधि, सरकारी संस्थानों की अंकेक्षण व्यवस्था पर किया शोध

पाली : उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में राजकीय बांगड़ स्नातकोत्तर महाविद्यालय, पाली के सहायक आचार्य एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट गिरीश मल ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय, हनुमानगढ़ की ओर से उन्हें शोध कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है। उनकी इस उपलब्धि से महाविद्यालय का गौरव बढ़ा है।
गिरीश मल ने अपने शोध में सरकारी एवं अर्द्धसरकारी संस्थानों में अंकेक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता का अध्ययन किया। उनका शोध वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही और वित्तीय अनियमितताओं की पहचान एवं रोकथाम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रहा।
गिरीश मल ने “सरकारी एवं अर्द्धसरकारी संस्थानों में अंकेक्षण कार्य की प्रभावशीलता का मूल्यांकन : एक अध्ययन” विषय पर अपना शोध कार्य पूर्ण किया। इस शोध के माध्यम से सरकारी और अर्द्धसरकारी संस्थानों में अंकेक्षण व्यवस्था की कार्यप्रणाली तथा उसकी प्रभावशीलता का गहन एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन किया गया।
शोध में यह समझने का प्रयास किया गया कि संस्थानों में वित्तीय गतिविधियों की निगरानी, अभिलेखों की जांच और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुपालन में अंकेक्षण किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके साथ ही वित्तीय अनियमितताओं की पहचान और उनकी रोकथाम में अंकेक्षण व्यवस्था की उपयोगिता को भी रेखांकित किया गया।
शोध में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को संस्थागत कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। अंकेक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन से वित्तीय गतिविधियों की समीक्षा, संभावित अनियमितताओं की पहचान और व्यवस्थागत सुधारों की दिशा में सहायता मिल सकती है।
अध्ययन में इस बात को भी रेखांकित किया गया कि सरकारी एवं अर्द्धसरकारी संस्थानों की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने में अंकेक्षण व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस दृष्टि से शोध का विषय वित्तीय प्रबंधन और संस्थागत प्रशासन के लिए उपयोगी माना जा सकता है।
गिरीश मल ने अपना शोध कार्य शोध निर्देशक डॉ. सुमन नरोलिया के कुशल मार्गदर्शन एवं निर्देशन में पूर्ण किया। शोध कार्य की सफल पूर्णता के बाद उन्हें श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय, हनुमानगढ़ की ओर से पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।
गिरीश मल की यह उपलब्धि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अकादमिक अध्ययन और शोध के महत्व को दर्शाती है। उनके शोध का विषय सरकारी एवं अर्द्धसरकारी संस्थानों में वित्तीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने तथा अंकेक्षण की भूमिका को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।



