पाली में वृद्धाश्रम और सखी वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण, बुजुर्गों व पीड़ित महिलाओं को मिलने वाली सुविधाओं की जांच

पाली : राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पाली के सचिव एवं अपर जिला न्यायाधीश विक्रम सिंह भाटी ने गुरुवार को पाली स्थित सेवा समिति द्वारा संचालित वृद्धाश्रम तथा राजकीय बांगड़ चिकित्सालय में संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने दोनों संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं, व्यवस्थाओं और जरूरतमंदों को दी जा रही सेवाओं का जायजा लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान विक्रम सिंह भाटी ने वृद्धाश्रम में निवासरत बुजुर्गों से मुलाकात कर उनसे बातचीत की। उन्होंने बुजुर्गों से उनकी दिनचर्या, उपलब्ध सुविधाओं, समस्याओं और आवश्यकताओं के बारे में जानकारी ली। साथ ही वृद्धाश्रम में उनके लिए की गई व्यवस्थाओं का भी अवलोकन किया।
निरीक्षण में वृद्धजनों के लिए पृथक-पृथक कक्ष, बेड, फिजियोथेरेपी, चिकित्सकीय जांच, आयुर्वेदिक उपचार, संतुलित एवं पौष्टिक आहार, साफ-सफाई सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध पाई गईं। भाटी ने बुजुर्गों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से संचालित निःशुल्क विधिक सहायता, नालसा हेल्पलाइन नंबर तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी।

वृद्धाश्रम के निरीक्षण के बाद सचिव भाटी ने राजकीय बांगड़ चिकित्सालय परिसर में संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने केंद्र पर उपलब्ध सुविधाओं, महिला हिंसा से प्रभावित पीड़िताओं को प्रदान की जा रही सहायता तथा संबंधित रिकॉर्ड का अवलोकन किया।
केंद्र प्रबंधक देवी बामणिया ने भाटी को बताया कि केंद्र के माध्यम से पीड़ित महिलाओं को चिकित्सा सुविधा, कानूनी सहायता, परामर्श (काउंसलिंग) और अस्थायी आश्रय जैसी सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इन सेवाओं का उद्देश्य संकट की स्थिति में महिलाओं को आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाना है।
निरीक्षण के दौरान विक्रम सिंह भाटी ने केंद्र प्रबंधन को निर्देश दिए कि महिला हिंसा से प्रभावित पीड़िताओं को त्वरित एवं संवेदनशील सहायता उपलब्ध करवाई जाए। उन्होंने पीड़ित महिलाओं की गोपनीयता बनाए रखने और काउंसलिंग के दौरान उन्हें हरसंभव सहयोग प्रदान करने पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि जिन पीड़िताओं को आवश्यकता हो, उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध करवाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आवेदन प्रेषित किया जाए, ताकि उन्हें समय पर कानूनी मदद मिल सके।
इस दौरान वन स्टॉप सेंटर के विभिन्न रजिस्टरों एवं पत्रावलियों की जांच की गई। संबंधित व्यवस्थाओं को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश देने के साथ ही विगत माह के आंकड़ों का भी संकलन किया गया। निरीक्षण का उद्देश्य वृद्धजनों और महिला हिंसा से प्रभावित पीड़िताओं को उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं एवं सहायता सेवाओं की स्थिति का जायजा लेना तथा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक निर्देश देना रहा।



