
पाली : पर्युषण पर्व के सातवें दिवस पर साध्वी काव्यलता (ठाणा-4) के पावन सानिध्य में “ध्यान दिवस” श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलमय नवकार मंत्र व मंगलाचरण से हुआ।
साध्वी श्री ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि — “आध्यात्मिक यात्रा का पहला सूत्र है ध्यान। जब तक मनुष्य अपनी इन्द्रियों पर संयम और नियंत्रण नहीं करता, तब तक ध्यान की गहराई को पाना कठिन है।”
उन्होंने मोबाइल के अति-उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों को धर्म और संयम के संस्कार देने चाहिए, न कि मोबाइल पर निर्भर बनाना चाहिए। साध्वी श्री ने पाँचों इन्द्रियों का सकारात्मक उपयोग करने, उपवास व आत्मशुद्धि के संकल्प अपनाने का संदेश दिया। भगवान महावीर के पूर्वजन्मों का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि वर्तमान के पवित्र भाव ही भविष्य का निर्माण करते हैं।

कार्यक्रम में साध्वी मधुस्मिता द्वारा रचित भक्ति गीत को साध्वी ज्योतियशा, साध्वी सुरभिप्रभा और साध्वी राहतप्रभा ने सामूहिक संगान में प्रस्तुत कर श्रद्धा-भक्ति का वातावरण बना दिया। अंत में साध्वी काव्यलता के सानिध्य में अष्ट प्रहरी, षट्प्रहरी व चतु:प्रहरी पौषध के संकल्प दिलाए गए तथा श्रावक-श्राविकाओं ने मासखमण सहित विभिन्न तपस्याओं का प्रत्याख्यान किया।
संयमित इन्द्रियाँ ही ध्यान का आधार हैं। उपवास और प्रत्याख्यान आत्मबल व आत्मशुद्धि के श्रेष्ठ साधन हैं। निर्मल भाव ही जीवन को महानता की ओर अग्रसर करते हैं। पाली की पावन धरती पर पर्युषण पर्व का यह ध्यान दिवस सभी के लिए आत्मिक जागरण और संयम का प्रेरक बना।



