
पाली : तेरापंथ भवन पाली में आज आध्यात्मिक ऊर्जा और आस्था का अनुपम संगम देखने को मिला, जहां साध्वी काव्यलता के सानिध्य में तप अनुमोदना एवं भक्ति का भव्य आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत साध्वी वृंद द्वारा नवकार महामंत्र से की गई, जिसके बाद महासभा सदस्य गौतम छाजेड़ ने प्रमुखा श्री का संदेश वाचन किया। अणुव्रत अध्यक्ष शिखरचंद चौरडिया ने तप अनुमोदनार्थ गीत-गायन प्रस्तुत कर समस्त उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।
इस विशेष अवसर पर महिला मंडल की 41 बहनों ने सामूहिक रूप से 41 दिन की कठोर तपस्या पूर्ण कर तप अनुमोदन किया। साथ ही तेयुप अध्यक्ष पीयूष चौपड़ा, अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की सदस्य विनीता बेगानी तथा अणुव्रत समिति के मंत्री अनिल भंसाली ने भी तप अनुमोदना कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

श्रीसंघ सभाध्यक्ष वीनु सा भंसाली ने कहा तपस्या करने वाले विरले होते हैं। मैना बाई भिक्षु भूमि की लंबी-लंबी तपस्या कर पाली का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित कर रही हैं। यह तप समाज को आध्यात्मिक उन्नयन की प्रेरणा देता है।
साध्वी ज्योतियशा, सुरभिप्रभा एवं राहतप्रभा ने मधुर गीत प्रस्तुत कर तप की अभ्यर्थना की। साध्वी काव्यलता ने अपने मार्मिक उद्बोधन में बताया कि मोक्षमार्ग के चार साधन – सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन, सम्यक् चारित्र और तप में से तप आत्मा को निर्मल बनाने का सर्वोत्तम माध्यम है।
मैना बाई भिक्षु, जिन्होंने 41 दिन की कठोर तपस्या पूरी की, आगामी 16 सितम्बर को अहमदाबाद में गुरु सान्निध्य में पारणा करेंगी। यह उनके द्वारा की गई लगातार चौथी लंबी तपस्या है। कार्यक्रम के दौरान साध्वी काव्यलता ने प्रेरक प्रसंग भी साझा किए, जिनमें कैंसर और कुष्ठ रोग को तप से पराजित करने के चमत्कार सम्मिलित थे।
विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि मैना बाई की इस तपस्या में लाभचंद और उनकी दोनों पुत्रियों का समर्पित सहयोग रहा। उन्होंने गुरु-शक्ति और भक्ति से ओतप्रोत होकर समाज को एक महान संदेश दिया। कार्यक्रम के समापन पर भक्ति का आयोजन किया गया तथा उपस्थित जनसमूह को सामूहिक भोजन सेवा प्रदान की गई। इस अवसर पर अणुव्रत समिति पाली को अखिल भारतीय स्तर पर तृतीय स्थान प्राप्त होने पर विशेष सम्मानित भी किया गया।
यह आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना, तपस्या के महत्व और भारतीय संस्कृति के मूल्य स्थापित करने की दिशा में एक प्रेरणादायी कदम के रूप में याद किया जाएगा।



