जिला कारागृह पाली का आकस्मिक निरीक्षण, जाति व धर्म आधारित भेदभाव नहीं, बंदियों ने जताई संतुष्टि

पाली : सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशों की पालना में जिला कारागृह पाली का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। इस निरीक्षण का उद्देश्य जेलों में जाति और लिंग आधारित किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकना और मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
निरीक्षण टीम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला एवं सेशन न्यायाधीश राजेंद्र कुमार, सचिव एवं अपर जिला न्यायाधीश विक्रम सिंह, अति. जिला मजिस्ट्रेट अश्विन के. पंवार, अति. पुलिस अधीक्षक नरेन्द्र सिंह देवड़ा, अति. जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) राजेन्द्र प्रसाद, अधिशाषी अभियंता सार्वजनिक निर्माण विभाग रतन लाल बंसल, जिला कारागृह कारापाल जोराराम, जेल चिकित्सक डॉ. रॉयमेन जोसफ तथा चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल मानसिंह आशिया सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे।

निरीक्षण के दौरान जेल में 115 बंदी निरुद्ध पाए गए। टीम द्वारा की गई वार्ता में बंदियों ने स्पष्ट किया कि कारागृह में किसी भी प्रकार का जाति, धर्म या सामाजिक-आर्थिक आधार पर भेदभाव नहीं होता। सभी कार्यों का बंटवारा रोटेशन आधार पर किया जाता है और किसी भी समुदाय या वर्ग विशेष के लिए विशेष व्यवहार नहीं रखा जाता।
निरीक्षण अधिकारियों ने जेल के विभिन्न रजिस्टरों की भी जांच की। पाया गया कि बंदियों के विवरण दर्ज करते समय जाति का उल्लेख नहीं किया जाता है। साथ ही किसी भी बंदी ने भेदभाव या मानवाधिकार हनन की शिकायत नहीं की। यह निरीक्षण इस बात का प्रमाण है कि पाली जिला कारागृह में मानवाधिकारों और न्यायिक निर्देशों की पूर्ण पालना की जा रही है।




