पाली : आरएसएस शताब्दी वर्ष उत्सव की धूम, सैकड़ों स्वयंसेवकों ने निकाले पथ संचलन, जगह-जगह हुआ भव्य स्वागत

पाली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन हुई थी। इस वर्ष संघ अपना 100वां शताब्दी वर्ष मना रहा है। इसी क्रम में पाली नगर की विभिन्न बस्तियों में विजयादशमी उत्सव व शस्त्र पूजन के साथ पथ संचलन कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। शनिवार को सुभाष नगर बी. बस्ती और टेगौर नगर बस्ती में हुए कार्यक्रमों में सैकड़ों स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में अनुशासित पथ संचलन निकाला। दोनों ही बस्तियों में संचलन मार्ग पर जगह-जगह पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया गया।
विभाग संघचालक मा. सुरेशचन्द्र माथुर ने बताया कि शताब्दी वर्ष पर नगर की सभी 30 बस्तियों में विजयादशमी उत्सव एवं पथ संचलन निकालने का निर्णय हुआ है। कुछ बस्तियों में कार्यक्रम सम्पन्न हो चुके हैं जबकि रविवार को 11 बस्तियों में आयोजन होगा, जिनमें शेखावत नगर, अम्बेडकर नगर, सोसायटी नगर, आनंद नगर, महालक्ष्मी नगर, इंद्रा कॉलोनी, केशव नगर, सरस्वती नगर, घरवाला जाव, सोमनाथ, और मोची कॉलोनी शामिल हैं।

सुभाष नगर बी. बस्ती के सामुदायिक भवन मैदान में हुए विजयादशमी उत्सव में कार्यक्रम की अध्यक्षता दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिरुद्ध शर्मा ने की। मुख्य वक्ता जिला प्रचारक मृत्युंजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि विजयादशमी असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि “संघ के 100 वर्ष राष्ट्र जागरण और एकता की यात्रा हैं। प्रत्येक स्वयंसेवक को इस अमृत काल में अपना अधिक समय समाज निर्माण में लगाना होगा।”
शस्त्र पूजन के बाद स्वयंसेवकों ने घोष वादन के साथ पथ संचलन निकाला जो सामुदायिक भवन से प्रारंभ होकर बस्ती के प्रमुख मार्गों से होते हुए गुलाब सागर आश्रम पर समाप्त हुआ। मार्ग में लोगों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।
टेगौर नगर बस्ती में कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जी. एन. अरोड़ा ने की। मुख्य वक्ता सहकार भारती राजस्थान के प्रदेश उपाध्यक्ष महेन्द्र कुमार दवे ने संघ के पंच परिवर्तनों — कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, स्व का बोध, नागरिक कर्तव्य और पर्यावरण संरक्षण — पर प्रकाश डाला।
शस्त्र पूजन एवं प्रार्थना के बाद स्वयंसेवकों ने एम. शांतिलाल मेहता सरस्वती विद्यालय से संचलन शुरू किया और विभिन्न मार्गों से होते हुए सीमंधर उद्यान पर समापन किया। संचलन के दौरान बस्तीवासियों ने पुष्प वर्षा कर उत्साह बढ़ाया।
दोनों ही बस्तियों में हुए कार्यक्रमों में मातृशक्ति व प्रबुद्ध नागरिकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। उत्सव के दौरान राष्ट्रभक्ति के गीत, घोष की ताल और अनुशासित संचलन ने वातावरण को देशभक्ति से ओतप्रोत कर दिया।



