संघ के शताब्दी वर्ष में पाली में भव्य विजयादशमी उत्सव, 223 स्थानों पर निकले पथ संचलन, भगवा ध्वज से गूंजा नगर

पाली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष महोत्सव के तहत रविवार को पाली में विजयादशमी उत्सव अत्यंत भव्य और उत्साहपूर्ण माहौल में मनाया गया। संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन हुई थी, और इस वर्ष संघ ने अपने सेवा व संस्कारों के 100 वर्ष पूर्ण किए हैं। इस उपलक्ष्य में नगर की 30 बस्तियों, विभाग के 140 मंडलों और 82 बस्तियों में एक साथ शस्त्र पूजन और पथ संचलन के कार्यक्रम आयोजित हुए।

विभाग संघचालक मा. सुरेश चंद्र माथुर ने बताया कि यह वर्ष संघ के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है। शताब्दी वर्ष महोत्सव को पूरे समाज का उत्सव बनाने के उद्देश्य से हर बस्ती, हर गांव में यह आयोजन किया गया। सभी कार्यक्रमों में संतों के सान्निध्य और प्रबुद्धजनों की अध्यक्षता में शस्त्र पूजन हुआ, वहीं समाज के सभी वर्गों ने एकजुट होकर सहभागिता निभाई।

मुख्य वक्ताओं ने कहा कि श्रेष्ठ समाज का निर्माण तभी संभव है जब संगठित और सामर्थ्यवान हिंदू समाज आगे आए। उन्होंने कहा कि संघ ने पिछले 100 वर्षों में देश, समाज और मानवता के लिए अनगिनत सेवा कार्य किए हैं। प्रत्येक बस्ती में शाखाओं के माध्यम से संघ देशभक्ति, अनुशासन और संस्कार का संचार कर रहा है।

पाली विभाग में आयोजित 223 स्थानों पर पथ संचलन निकाले गए। गणवेशधारी स्वयंसेवकों के साथ बच्चे, युवा, महिलाएं और नागरिक बड़ी संख्या में संचलन देखने और स्वागत के लिए सड़कों पर उमड़ पड़े। कई जगह स्केटिंग करते बच्चों ने भगवा ध्वज लेकर संचलन में हिस्सा लिया।
संचलन मार्गों पर तोरण द्वार सजाए गए, पुष्पवृष्टि हुई, और “भारत माता की जय, वंदे मातरम” के उद्घोषों से पूरा नगर गूंज उठा।

शहर की शिवाजी नगर बस्ती सहित कई स्थानों पर युवाओं का उत्साह चरम पर दिखा। मातृशक्ति और प्रबुद्ध नागरिकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भव्य बना दिया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने “पंच परिवर्तन”—कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी स्वभाव और नागरिक कर्तव्य—को श्रेष्ठ समाज निर्माण के पांच स्तंभ बताया। उन्होंने कहा, “संघ को केवल बाहर से मत देखिए, संघ में आकर जानिए और समाज निर्माण के इस महान कार्य में सहभागी बनिए।”



