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भागवत कथा में राधाकृष्णन महाराज ने कहा, संतों की सेवा से ही उत्पन्न होती है कथा सुनने की सच्ची भावना

पाली : शहर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन पूज्य राधाकृष्णन जी महाराज ने भक्तों को जीवन में संत सेवा, सत्संग और सद्ग्रंथों के अध्ययन का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि महात्माओं और संतों की सेवा करने से ही मनुष्य के भीतर भागवत कथा के प्रति रुचि और भाव उत्पन्न होते हैं।

महाराजश्री ने कहा कि जब व्यक्ति मन से कथा श्रवण करता है, तब भगवान श्रीहरि स्वयं उसके हृदय में विराजमान हो जाते हैं, जिससे मन के विकार समाप्त होकर शुभ भावों का उदय होता है। उन्होंने कहा कि अशुद्ध वासनाएं दूर होती हैं और लौकिक इच्छाओं से मुक्त होकर व्यक्ति आध्यात्मिक मार्ग की ओर अग्रसर होता है।

राधाकृष्णन जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं से कहा कि जब मन कहीं न लगे तो मोबाइल के स्थान पर सद्ग्रंथों और उत्तम साहित्य का अध्ययन करना चाहिए, जिससे मनुष्य को सही मार्ग की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि संतों और महात्माओं के तप में व्यवधान नहीं डालना चाहिए, क्योंकि यह पुण्य कार्यों में बाधा उत्पन्न करता है।

उन्होंने आगे कहा कि व्यक्ति का चरित्र सबसे महत्वपूर्ण होता है, धन नहीं। चरित्रवान व्यक्ति को ही देश सेवा, भक्ति, कीर्ति और जीवन में सच्चा रस प्राप्त होता है। महाराजश्री ने कहा कि हर गृहस्थ को अपने घर में पवित्रता बनाए रखनी चाहिए, सच्चे भाव से भोजन तैयार कर उसे भगवान को भोग लगाना चाहिए।

कार्यक्रम में परमेश्वर जोशी ने बताया कि कथा में आज मोहनलाल धानुका, महेश बंसल, शशिकांत तायल, दीपक अग्रवाल, अमित चूरू, महेश सराफ, किशन रतनगढ़, शांतिलाल बंसल, शिवलाल, मनीष सिंघल, कमल किशोर नागौरी, मंगला रोशनलाल जैन, गोपीकिशन बिरला, नंदकिशोर अरोड़ा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

Rajasthan Today

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